भिलाई। जलप्रदूषण रोकने के लिए विशालतम् नहीं बल्कि छोटी प्रतिमाएं बनानी चाहिए तथा उसका विसर्जन नदी, नाले, पोखर और तालाबों में नहीं वरन कुंड बनाकर करना चाहिए। आम जनता में यह संदेश देने के लिए सुप्रसिद्ध मूर्तिकार डॉ. अंकुश देवांगन ने दुनिया की सबसे छोटी मां दुर्गा की प्रतिमा ही बना डाली है। मात्र एक चने के दाने जितनी छोटी इस मूर्ति को एक महिला श्रद्धालु अपने उंगली पर रखकर निहार रही है। कलाकार ने कहा है कि मानवीय सभ्यता के कारण धरती इतनी तेजी से प्रदूषित हो रही है कि आने वाले 20-30 वर्षों में यह रहने लायक भी नहीं बचेगी। जिसके लिए हम सबको मिल जुलकर प्रयास करना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी को हम स्वस्थ धरती दे सकें और जिसके लिए उन्हें अपने पूर्वजों पर गर्व हो। बहरहाल अंकुश द्वारा संगमरमर पत्थर को तराशकर बनाए गए इस कलाकृति की विशेषता है कि सूक्ष्मता के बावजूद इसमें माता की भावभंगिमा, आशीष देता हुआ हाथ, समस्त अस्त्र-शस्त्र और दहाड़ता हुआ शेर स्पष्ट परिलक्षित हो रहा है।
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मां दुर्गा की दुनिया की सबसे छोटी मूर्ति















