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लोकसभा में निचले सदन और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण प्रदान करने के लिए पेश किए गए तीन विधेयकों पर चर्चा फिर से शुरू हुई।


देश 17 April 2026
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लोकसभा में निचले सदन और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण प्रदान करने के लिए पेश किए गए तीन विधेयकों पर चर्चा फिर से शुरू हुई।

लोकसभा में तीन विधेयकों, संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार-विमर्श पुनः शुरू हुआ। इन तीनों विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।
 
संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से जाना जाता है, के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में लगभग एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना था। ये तीन विधेयक क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन को सुगम बनाने और लोकसभा एवं विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने वाले प्रावधानों को लागू करने के लिए लाए गए हैं।
 
संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026, जिसे कल कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में पेश किया, का उद्देश्य लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना है। 850 सीटों में से 815 सदस्य राज्यों से और 35 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से चुने जाएंगे। इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करना है।
 
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जो 2023 में पारित हुआ था, में यह प्रावधान था कि अधिनियम के लागू होने के बाद पहली जनगणना के आधार पर परिसीमन होने पर महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण प्रभावी होगा। संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक 2026 में कहा गया है कि अगली जनगणना और उसके परिणामस्वरूप होने वाले परिसीमन में काफी समय लगेगा, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की प्रभावी और समर्पित भागीदारी सीमित हो जाएगी। विधेयक का उद्देश्य नवीनतम प्रकाशित जनगणना के आधार पर परिसीमन के माध्यम से महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण को लागू करना है।
 
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा कल लोकसभा में पेश किए गए परिसीमन विधेयक 2026 में परिसीमन की प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान है, जिससे लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण सुनिश्चित होगा। परिसीमन आयोग को संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सहित महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का आवंटन करने का अधिकार दिया गया है।
 
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कल लोकसभा में केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम 1963, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार अधिनियम, 1991 और जम्मू एवं कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन करना है। यह विधेयक परिसीमन आयोग द्वारा संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्व्यवस्थापन का प्रावधान करता है।
 
कल लोकसभा में इन तीनों विधेयकों पर चर्चा के दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि देश की पचास प्रतिशत आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और नीति-निर्माण में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व देना समय की मांग है। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी को भी इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि वे भारत की महिलाओं को उदारतापूर्वक कुछ दे रहे हैं, क्योंकि यह उनका अधिकार है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पूरा राजनीतिक तंत्र दशकों से इस अधिकार को छीनने का दोषी है, इसलिए यह विधेयक प्रायश्चित का एक आवश्यक साधन है।
 
प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक विधेयक को राजनीतिक रंग न दें, क्योंकि यह सभी के लिए और देश के लोकतंत्र के लिए लाभकारी होगा। उन्होंने कहा कि जो लोग अब इस विधेयक का विरोध करेंगे, उन्हें भविष्य में इसके परिणाम भुगतने होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि यह विधेयक देश की दिशा और भविष्य को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक विकसित भारत केवल बुनियादी ढांचे, रेलवे या आर्थिक संकेतकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें महिलाओं की समान भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार नीति निर्माण में 'सबका साथ, सबका विकास' की भावना चाहती है।
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या की बात नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि लगभग छह हजार सात सौ ब्लॉक पंचायतों में से लगभग दो हजार सात सौ पंचायतों का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। श्री मोदी ने कहा कि आज जो देश प्रगति कर रहा है, उसमें महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान है और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब यह अनुभव सदन का हिस्सा बनेगा, तो इससे कार्यकुशलता कई गुना बढ़ जाएगी।
प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि इस कानून को लागू करते समय किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा। श्री मोदी ने आगे कहा कि अतीत में जो भी परिसीमन किया गया है और तब से जो अनुपात अपनाए गए हैं, वे अपरिवर्तित रहेंगे।
 
इस विधेयक पर चर्चा के दौरान संक्षिप्त संबोधन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों की संख्या में कमी को लेकर विपक्ष की आशंकाओं को खारिज कर दिया। श्री शाह ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी क्षेत्र की सीटों में कोई कमी न आए और दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में वृद्धि हो। श्री शाह ने कहा कि वर्तमान में 543 सीटों में से दक्षिणी राज्यों की विधानसभा में संख्या 129 है, जो लगभग 23.76 प्रतिशत है और लोकसभा की नई संख्या के अनुसार, सीटों की संख्या बढ़कर 195 हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि जनसंख्या में बदलाव को ध्यान में रखते हुए संतुलन और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई गई है।
 
कल हुई बहस में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिला आरक्षण का प्रावधान सर्वप्रथम पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा लागू किया गया था। उन्होंने कहा कि इस कदम से जमीनी स्तर पर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार के महिला आरक्षण कानून के कार्यान्वयन को भविष्य के परिसीमन से जोड़ने के निर्णय पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि सीटों की संख्या बढ़ाए बिना सरकार वर्तमान 543 लोकसभा सीटों के साथ महिलाओं के लिए आरक्षण तुरंत क्यों लागू नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जाति जनगणना न कराकर और 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर अड़े रहकर अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के अधिकारों को छीनना

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