मत्स्यपालन, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने आज देश के औषधि एवं जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को मजबूत करने में अनुसंधान और नवाचार के महत्व पर प्रकाश डाला। नई दिल्ली में आयोजित 'प्रयोगशाला पशु कल्याण: नीतियां एवं सर्वोत्तम प्रथाएं' विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने वैज्ञानिक प्रयोगों में प्रयुक्त पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मंत्री जी ने कहा कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत गठित पशु प्रयोगों के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण समिति (सीसीएसईए) विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और अनुसंधान संस्थानों में पशु प्रयोग सुविधाओं के विनियमन और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनुसंधान और परीक्षण प्रक्रियाओं के दौरान पशुओं को कम से कम असुविधा हो।
देश की बढ़ती दवा और जैव प्रौद्योगिकी क्षमताओं पर प्रकाश डालते हुए, श्री सिंह ने कहा कि देश अनुसंधान, जेनेरिक दवाओं और वैक्सीन उत्पादन के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है। कोविड-19 महामारी के दौरान देश की प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों और दवा कंपनियों ने सीमित समय में टीके विकसित किए और उन्हें 150 से अधिक देशों को आपूर्ति की।
इस अवसर पर बोलते हुए मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने वैज्ञानिक अनुसंधान और पशुओं के प्रति करुणा एवं नैतिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि करुणा, मानवता और सहअस्तित्व पर आधारित भारत के सभ्यतागत मूल्यों को पशुओं से संबंधित अनुसंधान पद्धतियों का मार्गदर्शक होना चाहिए।
इस बीच, मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति और पशु कल्याण साथ-साथ चलने चाहिए। उन्होंने नैतिक अनुसंधान पद्धतियों को मजबूत करने के लिए पशु प्रयोगों में वैकल्पिक तरीकों की खोज, कमी और सुधार के महत्व पर जोर दिया।
सम्मेलन के दौरान, मंत्री ने बड़े जानवरों से जुड़े अनुसंधान में पारदर्शिता और नियामक अनुपालन में सुधार लाने के उद्देश्य से ऑनलाइन अनुसंधान प्रोटोकॉल पोर्टल का भी शुभारंभ किया।







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