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पहले आईबीसीए सम्मेलन का प्रधानमंत्री करेंगे उद्घाटन, 95 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल


देश 11 May 2026
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पहले आईबीसीए सम्मेलन का प्रधानमंत्री करेंगे उद्घाटन, 95 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

नई दिल्ली, 11 मई । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की पहल पर गठित इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) के पहले वैश्विक सम्मेलन का एक जून को उद्घाटन करेंगे। भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन की थीम “विशालकाय बिल्लयों को बचाओं, पारिस्थितिकी तंत्र को बचाओ, मानवता को बचाओ है। इसमें दुनिया भर के 95 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

इस दौरान बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा सहित सात विशालकाय बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा पर चर्चा होगी।

आईबीसीए के महानिदेशक डॉ. एसपी यादव ने यहां सोमवार को पत्रकारों को बताया कि सम्मेलन में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख बिग कैट संरक्षण को लेकर अपने अनुभव और रणनीतियां साझा करेंगे।

इस दौरान विशालकाय बिल्लियों के संरक्षण के लिए दिल्ली के घोषणापत्र को भी अपनाया जाएगा। यह विशालकाय बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में अहम वैश्विक दस्तावेज माना जा रहा है।

एक और दो जून को ताज पैलेस में तकनीकी सत्र आयोजित होंगे। इनमें 400 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ, नीति निर्माता, वैज्ञानिक, वित्तीय संस्थानों और कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

सम्मेलन के दौरान एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें जनजातीय कला, बिग कैट्स पर आधारित पेंटिंग्स, फोटोग्राफी, फिल्में और वर्चुअल रियलिटी अनुभव प्रदर्शित किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि विशालकाय बिल्ली प्रजातियां पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। इनके आवास कार्बन सिंक के रूप में जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करते हैं और जलस्रोतों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं।

हालांकि, आवासों के सिकुड़ने, मानव-वन्यजीव संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और वन्यजीव बीमारियों जैसी चुनौतियों के कारण इन प्रजातियों पर खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में आईबीसीए सम्मेलन को वैश्विक संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि आईबीसीए

की शुरुआत अप्रैल 2023 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी। मार्च 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद इसका औपचारिक गठन हुआ और फरवरी 2025 से यह पूरी तरह सक्रिय हो गया। भारत सरकार ने इसके लिए पांच वर्षों में लगभग 18 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता देने का फैसला किया है।

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