नई दिल्ली, 15 मई। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने मध्य प्रदेश के धार शहर स्थित भोजशाला को मंदिर करार दिए जाने के मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे अविलंब हिंदुओं को सौंपने की मांग की है।
विहिप के संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेन्द्र जैन ने उच्च न्यायालय के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह हिंदू समाज के 550 सालों के संघर्ष का फल है। सभी इतिहास से भलीभांति परिचित हैं। बावजूद इसके मुस्लिम समाज सच्चाई को झुठलाता रहा है। इतिहास गवाह है कि हमारे सैंकड़ों मंदिरों को तोड़ा गया। विहिप किसी भी समाज का विरोधी नहीं है लेकिन हिंदू समाज की आस्था को देखते हुए सभी समाज को उसका सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भोजशाला के बाद अब मथुरा और काशी के मंदिर के मामले में भी हिंदू समाज की जीत होगी। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार से भोजशाला को अविलंब हिंदुुओं को सौंपने की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार से भारत में चुराई गई मां सरस्वती की प्रतिमा को ब्रिटेन से वापस लाने की भी मांग की।उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि भोजशाला में हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई है।
ऐतिहासिक साहित्य और रिकॉर्ड यह साबित करते हैं कि विवादित क्षेत्र भोजशाला था, जो परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता था। हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की अधिसूचनाओं और सर्वेक्षण रिपोर्ट पर विचार किया। एएसआई के पुरातात्विक साक्ष्यों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया गया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका का निम्नलिखित निर्देशों के साथ निपटारा किया जाता है- भोजशाला और कमल मौला मस्जिद का विवादित क्षेत्र 18/3/1904 से अधिनियम 1958 के तहत संरक्षित स्मारक है।
इस क्षेत्र का धार्मिक स्वरूप देवी वाग्देवी सरस्वती के मंदिर सहित भोजशाला है।केंद्र सरकार और एएसआई धार में स्थित विवादित संपत्ति के अंतर्गत भोजशाला मंदिर और संस्कृत शिक्षण के उद्देश्यपूर्ण प्रशासन और प्रबंधन के लिए निर्णय लेंगे।
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