09 जून । अमेरिका में, एक संघीय न्यायाधीश ने फैसला सुनाया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा एच-1बी आवेदनों पर लगाया गया 1 लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क गैरकानूनी था। मैसाचुसेट्स के बोस्टन स्थित अमेरिकी जिला न्यायालय के न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने अपने फैसले में कहा कि यह नीति कांग्रेस द्वारा आवश्यक अनुमति के बिना एच-1बी आवेदनों पर कर लगाती है। अमेरिका स्थित भारतीय प्रवासी संगठनों ने संघीय न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि यह नवाचार और उद्यमिता में अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को बनाए रखने के लिए उचित है।
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) के नीति एवं रणनीति प्रमुख खंडेराव कांड ने कहा कि अदालत के फैसले से रोजगार आधारित आव्रजन प्रणाली में पूर्वानुमान और निष्पक्षता बहाल हो गई है। इंडियास्पोरा के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा ने कहा कि अदालत के आदेश के बाद एच-1बी वीजा से जुड़े सभी हितधारकों ने राहत की सांस ली है।
एच-1बी कार्यक्रम अमेरिका के सबसे लोकप्रिय कार्य वीजा में से एक है, जो अमेरिकी कंपनियों को कुशल वैश्विक प्रतिभाओं को नियुक्त करने की अनुमति देता है। ट्रंप के उस आदेश से, जिसमें प्रत्येक एच-1बी कर्मचारी के लिए 100,000 अमेरिकी डॉलर का वार्षिक शुल्क प्रस्तावित किया गया है, वीजा सुधारों और नई आवश्यकताओं को लेकर कई लोग अनिश्चित हो गए हैं।














