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सब्सक्रिप्शन के लिए खुला वाटरवेज लीजर टूरिज्म का आईपीओ, 25 जून तक लगा सकते हैं बोली


विदेश 23 June 2026
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सब्सक्रिप्शन के लिए खुला वाटरवेज लीजर टूरिज्म का आईपीओ, 25 जून तक लगा सकते हैं बोली

नई दिल्ली, 23 जून । देश की सबसे बड़ी समुद्री क्रूज ऑपरेटर कंपनियों में से एक वाटरवेज लीजर टूरिज्म लिमिटेड का 585 करोड़ रुपये का आईपीओ आज सब्सक्रिप्शन के लिए लॉन्च कर दिया गया। इस आईपीओ में 25 जून तक बोली लगाई जा सकती है। इश्यू की क्लोजिंग के बाद 29 जून को शेयरों का अलॉटमेंट किया जाएगा, जबकि 30 जून को अलॉटेड शेयर डीमैट अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाएंगे। कंपनी के शेयर एक जुलाई को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हो सकते हैं।

इस आईपीओ में बोली लगाने के लिए 769 रुपये से लेकर 808 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 18 शेयर का है। इस आईपीओ में रिटेल इनवेस्टर्स कम से कम 1 लॉट यानी 18 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं, जिसके लिए उन्हें 14,544 रुपये का निवेश करना होगा। इसी तरह रिटेल इनवेस्टर 1,89,072 रुपये के निवेश से अधिकतम 13 लॉट में 234 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं। आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 72,40,099 नए शेयर बेचे जा रहे हैं।

इस आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व किया गया है। इसके अलावा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए अधिकतम 10 प्रतिशत हिस्सा और नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (एनआईआई) के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व है। इस इश्यू के लिए सेंट्रम ब्रोकिंग लिमिटेड को बुक रनिंग लीड मैनेजर बनाया गया है, जबकि एमयूजीएफ इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को रजिस्ट्रार बनाया गया है।

वाटरवेज लीजर टूरिज्म लिमिटेड की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत में लगातार उतार चढ़ाव होता रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 122.73 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। हालांकि अगले वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी 168.19 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाने में सफल रही। इसके बाद पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध लाभ घट कर 52.14 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में उतार चढ़ाव के बावजूद बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 452.15 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 597.68 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसके बाद अगले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की राजस्व प्राप्ति घट कर 586.99 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गयी।

इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर 5.18 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 30.44 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसी तरह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ उछल कर 101.90 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया था।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) के स्तर में भी उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2023-24 में ईबीआईटीडीए 111.15 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 215.46 करोड़ रुपये और 2025-26 में घट कर 117.48 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

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