नई दिल्ली में आयोजित आतंकवाद विरोधी भारत-रूस संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) की 14वीं बैठक के दौरान भारत और रूस ने हिंसक उग्रवाद, कट्टरता और आतंकवाद वित्तपोषण सहित आतंकवाद से निपटने में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की है।
8 जुलाई को आयोजित इस बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और रूसी उप विदेश मंत्री दिमित्री ल्युबिंस्की ने की। दोनों देशों के संबंधित विभागों और एजेंसियों के अधिकारियों ने भी इसमें भाग लिया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की। उन्होंने पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले और 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुई आतंकी घटना की भी कड़ी निंदा की।
भारत और रूस ने आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा नामित समूह, साथ ही उनके प्रतिनिधि समूह और सहयोगी संगठन शामिल हैं।
दोनों देशों ने आतंकवाद का मुकाबला करने के अपने अनुभवों को साझा किया और हिंसक उग्रवाद, कट्टरता, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादी गतिविधियों के लिए डिजिटल वित्तीय प्रौद्योगिकियों सहित नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
इस चर्चा में क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर मौजूदा और उभरते आतंकवादी खतरों को भी शामिल किया गया।
दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय तंत्रों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सहित बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
आतंकवाद विरोधी मामलों पर भारत-रूस संयुक्त कार्य समूह की अगली बैठक आपसी सहमति से तय की गई तारीख को रूस में आयोजित की जाएगी।
इस वार्ता का पिछला दौर नवंबर 2024 में मॉस्को में आयोजित किया गया था।















