विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आधुनिक, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुकूल कानूनी वातावरण बनाने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता पर जोर दिया है। नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग (यूएनसीआईटीआरएएल) की 60वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि आयोग ने समावेशिता, आम सहमति और विविध कानूनी परंपराओं के सम्मान के सिद्धांतों को बनाए रखते हुए उभरती वास्तविकताओं के अनुकूल ढलने की अपनी क्षमता का लगातार प्रदर्शन किया है।
उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा प्राधिकरण (UNCITRAL) के निरंतर सदस्य आठ देशों में से एक होने के नाते, भारत ने कई क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून के विकास में सक्रिय योगदान दिया है। डॉ. जयशंकर ने तकनीकी परिवर्तनों, डिजिटल वाणिज्य, विकसित होती आपूर्ति श्रृंखलाओं और निवेश के नए स्वरूपों से प्रेरित वैश्विक परिवर्तनों पर भी जोर दिया, जो वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और डेटा के सीमा पार आवागमन को प्रभावित करते हैं।
मंत्री ने पूर्वानुमानित और सामंजस्यपूर्ण कानूनी ढाँचों, कुशल विवाद-समाधान तंत्रों और सीमा पार लेन-देन में अधिक निश्चितता की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून के विकास में वैश्विक दक्षिण के हितों की भूमिका महत्वपूर्ण है, ताकि उनकी विकासात्मक प्राथमिकताओं और व्यावहारिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित किया जा सके।















