भारतीय रेलवे ने माल ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में एक नई तकनीकी उपलब्धि हासिल करते हुए देश का पहला वंदे भारत मंच आधारित फ्रेट ई लक्ष्य (सुपरफास्ट मास्टर रेक) का सफल प्रयास शुरू किया है। पहले दिन ही इस आइटम रेक ने 145 किमी प्रति घंटे की कमाई कर भारतीय रेलवे के हाई-स्टेट नेटवर्क की दिशा में नई शुरुआत की।
अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की निगरानी में यह परीक्षण 29 जुलाई 2026 से शुरू हुआ और लगभग एक महीने तक विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए गए। कोटा-नागदा-सवाई माधोपुर रेलखंड का परीक्षण किया जा रहा है।
पहला दिन सफल रहा- स्ट्रोइक परीक्षण
परीक्षण के पहले दिन विशेष फ्रेट ई-लाभ सुबह 6 बजे कोटा से महिदपुर रोड के लिए निकला। शुरुआत में 120 किमी प्रति घंटे की गैर-अभिलेखित गति का परीक्षण किया गया, जबकि बाद में 120 और 135 किमी प्रति घंटे की रिकॉर्ड गति का परीक्षण किया गया। वापसी के दौरान रेक ने 145 किमी प्रति घंटा की अधिकतम गति प्राप्त की। पूरे परीक्षण के दौरान रेलवे ने पेट्रोलियम ग्रीन सिग्नल उपलब्ध कराए।
एक महीने तक होंगे कई अहम परीक्षण
परीक्षण अवधि में इस फ्रेट ई क्वालीफायर पर विभिन्न मानदंडों में उच्च तकनीकी तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे। इनमें ऑसिलेशन प्लांट, सर्किट ब्रेकिंग स्ट्रेंथ (ईबीडी), कपलर फोर्स, कर्व प्लांट, ट्रैक्शन एवं ब्रेकिंग सिस्टम, रीजनरेटिव एनर्जी (पुनर्जीवित ऊर्जा), सिग्नल एवं सिस्टम, सिग्नल एवं सिस्टम, सर्किट ब्रेकर, सर्किट ब्रेकर सिस्टम और सुरक्षा उपकरण का परीक्षण शामिल है।
वंदे भारत तकनीक से तैयार आधुनिक फ्रेट रेक
इंटीग्रल कोच रेक (आईसीएफ), चेन्नई द्वारा विकसित यह 16 कोचों वाला फ्रेट ई टार्गेट भारतीय रेलवे का पहला वंदे भारत मंच आधारित मालवाहक रेक है। इसमें 2 रेफ्रिजिरेटर नामित वैन, 2 एनडीटीसी और 12 सॉसेज कोच लगाए गए हैं।
इस रेक की कुल 397.02 टन पेलोड क्षमता है और इसे ई-कॉमर्स, एक्सप्रेस स्टार्स, कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स और टाइमबिल्ड माल ट्रांसपोर्ट को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। वंदे भारत ट्रेन में
सुरक्षा और तकनीक का आधुनिक संयोजन
फ्रेट ई लॉकेट में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इसमें स्वचालित एलसीडी शॉक्सिंग डोर, फ़ोर्ड रिवाइवल, न्यू एसोसिएट्स रेज़ॉलूशन फ़्लोरिंग, बोल्ट्स, इलेक्ट्रानिक लाइटिंग, अग्नि सुरक्षा प्रणाली और न्यूक्लियर लॉकिंग जैसे सोलर उपकरण उपलब्ध हैं। सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था के तहत 5 किमी प्रति घंटे से अधिक गति के साथ सभी दरवाजों पर स्वतः लॉक हो जाते हैं और सभी दरवाजों पर पूरी तरह से बंद होने के बाद ही रेक का संचालन संभव होता है।
ट्रांसपोर्ट को मिलती है नई खरीददारी
भारतीय रेलवे का फेलो है कि ऑफिसर्स के बाद यह हाई- स्ट्रोइक फ्रेट ई पोर्टफोलियो देशों में स्ट्रैटेजी और लॉजिस्टिक्स सेवाओं में बड़ा बदलाव। इस पारंपरिक मालगाडी पर व्यावसायिक संचालन शुरू हो गया है, इसकी तुलना में अधिक तेज़, सुरक्षित, समयबद्ध और विश्वसनीय परिवहन विकल्प उपलब्ध होंगे। इसके जरिए ई-कॉमर्स, कोल्ड-चेन और एक्सप्रेस सर्विसेज सर्विसेज से भी नई स्पीड मिलने की उम्मीद है।
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वंदे भारत की समीक्षा अब मालागारी में भी, 145 Km/H की स्पीड से दौड़ती हुई फ्रेट ई क़ीमत
















