रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के रक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय के सैन्य और नागरिक विभागों के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया है। आज नई दिल्ली में सशस्त्र बल मुख्यालय के 85वें नागरिक सेवा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि इससे सुरक्षा और तकनीकी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सकेगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्दीधारी और नागरिक दोनों सेवाएं 'राष्ट्र सर्वोपरि' के प्रति समान रूप से प्रतिबद्ध हैं, और जब लक्ष्य एक ही होता है, तो व्यवस्था का हर तत्व राष्ट्रीय शक्ति में परिवर्तित हो जाता है।
रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सैन्य और प्रशासनिक एकीकरण अलग-अलग रास्तों पर नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे संयुक्त और एकीकृत संरचनाएं विकसित होंगी, नीति, प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन आदि क्षेत्रों में निरंतरता और विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी। श्री सिंह ने संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विकासात्मक कार्यों के माध्यम से नागरिक और सैन्य अधिकारियों के बीच संरचित आदान-प्रदान को और बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिससे दोनों पक्ष एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकें।
मंत्री ने कहा कि सशस्त्र बल मुख्यालय (एएफएचक्यू) की सेवाएं रक्षा मंत्रालय की संस्थागत स्मृति हैं। श्री सिंह ने कहा कि एएफएचक्यू कैडर एक ऐसी संस्था है जो रक्षा मंत्रालय को निरंतरता, विशेषज्ञता और नीतिगत स्थिरता प्रदान करती है। रक्षा मंत्री ने कहा कि एएफएचक्यू नागरिक-सैन्य समन्वय को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका भी निभाता है।
मंत्री ने रक्षा मुख्यालय के कर्मियों से अपने दायित्व और भूमिका से आगे बढ़कर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने उनसे रक्षा प्रौद्योगिकी अनुसंधान, भू-रणनीतिक चिंतन और नए विचारों के माध्यम से देश के रक्षा तंत्र को मजबूत करने में योगदान देने का भी आग्रह किया।





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