पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) में जारी अशांति के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। इसी बीच, संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (जेएएसी) ने पाकिस्तानी सेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जेएएसी का दावा है कि बाग जिले में प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना ने गोलीबारी की और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। समिति ने एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घटना से जुड़ा कथित वीडियो फुटेज साझा करते हुए इन आरोपों को सामने रखा है। साझा किए गए फुटेज में कथित तौर पर इलाके में तनावपूर्ण स्थिति और सुरक्षा बलों की कार्रवाई दिखाई दे रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
जेएएसी के आरोपों में मुजफ्फराबाद जिले के मकरी इलाके में नागरिकों की मोटरसाइकिलों को आग लगाने की घटना भी शामिल है। समिति का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने कार्रवाई के दौरान स्थानीय नागरिकों के वाहनों को निशाना बनाया। इन घटनाओं ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। पीओजेके में लंबे समय से स्थानीय स्तर पर महंगाई, बिजली की कीमतों, करों, रोजगार, प्रशासनिक व्यवस्था और अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर असंतोष देखने को मिलता रहा है। हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
जेएएसी और स्थानीय प्रदर्शनकारियों की ओर से पाकिस्तानी प्रशासन तथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मांगों को सुनने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाया जा रहा है। दूसरी ओर, सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से की जा रही कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में क्षेत्र में कथित हिंसा के कारण 50 से अधिक लोगों के मारे जाने और सैकड़ों के घायल होने के दावे किए गए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि और विस्तृत आधिकारिक जानकारी सीमित है।
लगातार बढ़ती हिंसा के बीच पीओजेके के कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की खबरें हैं। सड़क यातायात, बाजार और स्थानीय गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ रहा है। नागरिक संगठनों और प्रदर्शनकारियों की मांग है कि हिंसा तत्काल रोकी जाए और नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग की घटनाओं की निष्पक्ष जांच हो। वहीं, मौजूदा हालात ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक और सामाजिक असंतोष को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। स्थिति पर आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई और बातचीत से यह तय होगा कि क्षेत्र में तनाव कम होता है या विरोध और हिंसा का दौर आगे भी जारी रहता है।















