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सोने-चांदी की कीमतों में उछाल, पांच सत्रों में सोना 8,600 रुपये से ज्यादा महंगा


व्यापार 10 August 2026
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सोने-चांदी की कीमतों में उछाल, पांच सत्रों में सोना 8,600 रुपये से ज्यादा महंगा

त्योहारी सीजन से पहले बढ़ती खरीदारी और वैश्विक बाजारों से मिल रहे मजबूत संकेतों के बीच सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर दोनों कीमती धातुओं में मजबूत खरीदारी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ती दिखाई दी। 

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला सोना 0.69 प्रतिशत यानी 1,050 रुपए उछलकर 1,52,870 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसने 1,52,946 रुपए का दिन का हाई टच किया। वहीं दिन का निचला स्तर 1,51,461 रुपए रहा।

पिछले एक सप्ताह में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है। 31 जुलाई को एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोना 1,43,376 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि पिछले शुक्रवार को इसका भाव बढ़कर 1,51,985 रुपए पर पहुंच गया। इस तरह केवल पांच कारोबारी सत्रों में सोने की कीमत में 8,609 रुपए प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हुई। सोमवार के भाव के आधार पर देखें तो 31 जुलाई की तुलना में सोना कुल 8,644 रुपए प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है।

वहीं चांदी ने सोने से भी बेहतर प्रदर्शन किया। सोमवार को एमसीएक्स पर सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी 1.50 प्रतिशत यानी 3,473 रुपए की उछाल के साथ 2,34,939 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। कारोबार के दौरान चांदी ने 2,35,221 रुपए का उच्चतम स्तर और 2,31,660 छुआ।

चांदी में तेजी का रुख पिछले एक सप्ताह से लगातार बना हुआ है। 31 जुलाई को एमसीएक्स पर चांदी की कीमत 2,18,295 रुपए प्रति किलोग्राम थी, जो पिछले शुक्रवार को बढ़कर 2,31,381 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। यानी पांच कारोबारी दिनों में चांदी 13,086 रुपए प्रति किलो महंगी हुई। सोमवार के भाव को आधार मानें तो 31 जुलाई के मुकाबले चांदी की कीमत में कुल 15,435 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है।

वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और त्योहारी मांग मजबूत रहती है, तो आने वाले दिनों में सोना और चांदी दोनों में तेजी का रुख जारी रह सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुख पर बनी हुई है, जो आगे की दिशा तय करेंगे।

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