Breaking News

इथेनॉल आपूर्ति ने पार किया 800 करोड़ लीटर का आंकड़ा, अनाज आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी 76%


विज्ञान 12 August 2026
post

इथेनॉल आपूर्ति ने पार किया 800 करोड़ लीटर का आंकड़ा, अनाज आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी 76%

भारत में इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2025-26 के दौरान इथेनॉल की संचयी आपूर्ति 800 करोड़ लीटर के आंकड़े को पार कर गई है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में कुल इथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित फीडस्टॉक की हिस्सेदारी करीब 76 प्रतिशत रही।

जुलाई में कुल 93 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई, जिससे संचयी आपूर्ति 800 करोड़ लीटर के पार पहुंच गई। महीने के दौरान अनाज आधारित स्रोतों से 71 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई। इसके मुकाबले जून में कुल 103 करोड़ लीटर में से 75 करोड़ लीटर अनाज आधारित स्रोतों से आया था।

इस वजह से जुलाई में कुल इथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 76 प्रतिशत हो गई, जो जून में लगभग 73 प्रतिशत थी, हालांकि कुल मासिक आपूर्ति में कमी आई।

मक्का और अतिरिक्त FCI अनाज प्रमुख स्रोत

अनाज आधारित इथेनॉल में मक्का और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अतिरिक्त अनाज प्रमुख स्रोत रहे। जुलाई में दोनों से 30-30 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई। दोनों स्रोतों ने मिलकर अनाज आधारित इथेनॉल की करीब 85 प्रतिशत आपूर्ति की।

इसके अलावा, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न से भी 11 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई। यह इथेनॉल उत्पादन के लिए विभिन्न प्रकार के अनाज स्रोतों के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाता है।

गन्ना आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी घटी

जुलाई में गन्ना आधारित फीडस्टॉक से 22 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई, जो जून के 28 करोड़ लीटर से कम है।

कुल मासिक आपूर्ति में गन्ना आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी भी जून के 27 प्रतिशत से घटकर जुलाई में करीब 24 प्रतिशत रह गई।

गन्ना आधारित आपूर्ति में बी-हेवी मोलासेस से 17 करोड़ लीटर, गन्ने के रस से 4 करोड़ लीटर और सी-हेवी मोलासेस से 1 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई।

AIDA की उप महानिदेशक भारती बालाजी ने कहा कि 800 करोड़ लीटर का आंकड़ा पार करना भारत के इथेनॉल कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह घरेलू उद्योग द्वारा हासिल किए गए बड़े उत्पादन स्तर को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि मासिक आपूर्ति के मिश्रण में बदलाव भी महत्वपूर्ण है। जुलाई में अनाज आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी जून के करीब 73 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हो गई, जिसमें मक्का और अतिरिक्त FCI अनाज दोनों ने 30-30 करोड़ लीटर का योगदान दिया।

बालाजी के अनुसार, आपूर्ति पक्ष ने विभिन्न फीडस्टॉक और बढ़ते उत्पादन आधार के माध्यम से मांग के अनुरूप प्रतिक्रिया देने की क्षमता दिखाई है। अब अगली चुनौती इस उत्पादन क्षमता के लिए पर्याप्त मांग पैदा करना है।

उन्होंने कहा कि उच्च इथेनॉल मिश्रण, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और इथेनॉल के व्यापक इस्तेमाल से इस क्षेत्र की क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि उद्योग ने पिछले एक दशक में मजबूत उत्पादन आधार तैयार किया है और अब प्राथमिकता इस क्षमता का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना होना चाहिए। इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए स्पष्ट और पूर्वानुमानित नीति ढांचा निवेश को बनाए रखने, कृषि मूल्य श्रृंखला को समर्थन देने और स्वच्छ घरेलू ईंधन की दिशा में भारत के बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

AIDA के अनुसार, घरेलू इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ने और भारत के स्वच्छ परिवहन तथा नवीकरणीय ईंधन लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने के साथ इथेनॉल के इस्तेमाल के नए अवसर पैदा करना महत्वपूर्ण होगा।

You might also like!


Channel not found or invalid API Key.