Breaking News

नेपाल में वरिष्ठ पत्रकार को आधी रात गिरफ्तार किया गया, सुबह घर और दफ्तर पर छापा, विपक्ष ने विरोध जताया


विदेश 13 August 2026
post

नेपाल में वरिष्ठ पत्रकार को आधी रात गिरफ्तार किया गया, सुबह घर और दफ्तर पर छापा, विपक्ष ने विरोध जताया

काठमांडू, 13 अगस्त   नेपाल में वरिष्ठ पत्रकार एवं जनआस्था साप्ताहिक के प्रधान संपादक किशोर श्रेष्ठ की गिरफ्तारी पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। बुधवार देररात हुई गिरफ्तारी के बाद पत्रकारों ने जिला प्रशासन कार्यालय के सामने रातभर धरना दिया। गुरुवार सुबह श्रेष्ठ के आवास और जनआस्था साप्ताहिक के कार्यालय में छापा मारने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

श्रेष्ठ की गिरफ्तारी को लेकर पत्रकार संगठनों ने इसे प्रेस तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। पत्रकारों का आरोप है कि एक समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद श्रेष्ठ को गिरफ्तार किया गया और उनसे समाचार के स्रोत के बारे में जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

श्रेष्ठ की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में पत्रकार जिला प्रशासन कार्यालय के बाहर पहुंच गए। पत्रकारों ने रातभर धरना देते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि किसी प्रकाशित समाचार को लेकर शिकायत है तो कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, लेकिन पत्रकार को रात के समय गिरफ्तार कर दबाव में लेना लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रेस स्वतंत्रता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

गिरफ्तारी के बाद गुरुवार सुबह पुलिस ने श्रेष्ठ के घर और जनआस्था साप्ताहिक के कार्यालय में भी छापेमारी की। इस कार्रवाई ने पत्रकारों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी समाचार की रिपोर्टिंग को लेकर पत्रकार के आवास और मीडिया कार्यालय में इस तरह की कार्रवाई उचित है।

श्रेष्ठ और जनआस्था इससे पहले भी विवादों में रहे हैं। मई 2026 में श्रेष्ठ से जुड़ा एक विवादित ऑडियो सार्वजनिक हुआ था, जिसमें उन पर एक राजनीतिक नेता के खिलाफ समाचार प्रकाशित करने के लिए पैसे लेने का आरोप लगाया गया था। श्रेष्ठ ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे अपने और अपने मीडिया संस्थान को बदनाम करने की साजिश बताया था।

श्रेष्ठ की गिरफ्तारी के खिलाफ माओवादी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ समेत विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार की कार्रवाई का विरोध किया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि समाचार लिखने के कारण किसी पत्रकार को गिरफ्तार करना प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।

विपक्ष ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि श्रेष्ठ को किस कानूनी आधार पर गिरफ्तार किया गया और प्रकाशित समाचार में ऐसा क्या अपराध था जिसके कारण गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई आवश्यक हुई।

You might also like!


Channel not found or invalid API Key.