अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों में अमेरिकी भागीदारी को काफी कम करने का आदेश दिया है। ट्रंप ने पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ को यह निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे अभ्यास बेहद महंगे हैं और उत्तर कोरिया को अनावश्यक रूप से शत्रुतापूर्ण संदेश भेजते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और इसी कारण वह इन सैन्य गतिविधियों से संतुष्ट नहीं हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में यह स्पष्ट किया कि 11 दिवसीय ‘उलची फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास को पूरी तरह रद्द करना अब संभव नहीं है, इसलिए इसमें अमेरिकी भागीदारी को काफी सीमित किया जाएगा।
हालांकि, ट्रंप के आदेश के बावजूद दक्षिण कोरिया ने अभ्यास को रोकने का फैसला नहीं किया है। दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वार्षिक सैन्य प्रशिक्षण 17 अगस्त से 27 अगस्त तक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा। इस वर्ष लगभग 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिक इसमें हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास का उद्देश्य संभावित उत्तर कोरियाई हमले और अन्य सुरक्षा संकटों की स्थिति में दोनों सहयोगी देशों की सैन्य तैयारियों तथा आपसी समन्वय को मजबूत करना है। इसमें कंप्यूटर आधारित सिमुलेशन के साथ वास्तविक क्षेत्रीय प्रशिक्षण भी शामिल है।
इस बार के अभ्यास में बदलते सुरक्षा खतरों पर विशेष जोर दिया गया है। सैन्य बल ड्रोन हमलों का मुकाबला करने, साइबर हमलों से निपटने और जीपीएस व्यवधान जैसी परिस्थितियों में संचालन जारी रखने का प्रशिक्षण ले रहे हैं। उत्तर कोरिया इन अभ्यासों को लंबे समय से आक्रमण की तैयारी बताते हुए उनकी निंदा करता रहा है और हाल में उसने इन सैन्य गतिविधियों को उकसावे वाली कार्रवाई बताया है। दूसरी ओर, अमेरिका और दक्षिण कोरिया इन्हें रक्षात्मक तैयारियों का हिस्सा मानते हैं।
ट्रंप के फैसले ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य गठबंधन की भविष्य की दिशा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, संयुक्त अभ्यासों में कमी से उत्तर कोरिया को रोकने की क्षमता और सहयोगी सेनाओं के बीच तालमेल प्रभावित हो सकता है। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब उत्तर कोरिया अपनी मिसाइल और परमाणु क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है तथा रूस के साथ उसके सैन्य संबंध भी बढ़े हैं। इसलिए अभ्यासों में कटौती को लेकर दक्षिण कोरिया और अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञों में चिंता स्वाभाविक है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रंप के आदेश और सियोल के रुख के बीच अभ्यास जारी है। हालांकि अमेरिकी भागीदारी में वास्तविक रूप से कितनी कटौती होगी, इसका पूरा परिचालन विवरण अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। इस घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि वाशिंगटन उत्तर कोरिया के साथ तनाव कम करने और कूटनीतिक विकल्पों को खुला रखने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है, जबकि दक्षिण कोरिया अपनी सैन्य तैयारियों और रक्षा क्षमता को कमजोर नहीं करना चाहता।















