विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर दलेला ने आज कहा कि ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान भारत ने सामूहिक प्रयासों के केंद्र में लोगों को रखा है और ब्रिक्स सहयोग के लिए जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने ये बातें नई दिल्ली में ब्रिक्स सिविल फोरम 2026 को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि अध्यक्षता में विभिन्न शहरों में साढ़े तीन सौ से अधिक बैठकें संपन्न हुई हैं, जिनसे विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिणाम प्राप्त हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि इन बैठकों ने ब्रिक्स के तीनों मूलभूत स्तंभों - राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग, वित्तीय सहयोग और जन-जन साझेदारी - के बीच सहयोग को मजबूत किया है।
श्री दलेला ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बढ़ते आर्थिक प्रभाव और सामूहिक आवाज को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत ब्रिक्स को संवाद और विकास के लिए एक रचनात्मक मंच के रूप में देखता है, जो व्यवस्था और बहुपक्षीय प्रणाली का पूरक है। सिविल फोरम 2026 के बारे में बात करते हुए, श्री दलेला ने कहा कि इस आयोजन से प्राप्त सुझाव इस वर्ष आयोजित होने वाले ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए मूल्यवान होंगे।















