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डिजिटल वाणिज्य से एमएसएमई को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर आईआईटी मद्रास में राष्ट्रीय संगोष्ठी


देश 20 August 2026
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डिजिटल वाणिज्य से एमएसएमई को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर आईआईटी मद्रास में राष्ट्रीय संगोष्ठी

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने चेन्नई स्थित एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय के माध्यम से आईआईटी मद्रास के उद्यमिता प्रकोष्ठ के सहयोग से 18 अगस्त को आईआईटी मद्रास में “स्थानीय से वैश्विक तक: डिजिटल वाणिज्य के माध्यम से निर्यात के लिए तैयार एमएसएमई को सक्षम बनाना” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें एमएसएमई, उद्यमी, छात्र, नीति निर्माता, वित्तीय संस्थान, निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र के हितधारक और डिजिटल वाणिज्य विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

डिजिटल वाणिज्य से वैश्विक बाजार तक पहुंच पर जोर

संगोष्ठी में एमएसएमई को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए व्यावहारिक रास्तों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने डिजिटल वाणिज्य की मदद से भौगोलिक सीमाओं से आगे बढ़कर नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने और निर्यात क्षमता विकसित करने के अवसरों पर प्रकाश डाला।

केंद्र और राज्य के बीच मजबूत समन्वय की अपील

उद्घाटन सत्र में तमिलनाडु के एमएसएमई विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रवीण यादव ने विशेष संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल वाणिज्य भौगोलिक सीमाओं को पार करते हुए एमएसएमई की वैश्विक बाजारों तक पहुंच को बदल रहा है। उन्होंने एमएसएमई की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में केंद्र और राज्य के बीच मजबूत समन्वय का आह्वान किया।

नवाचार और उद्योग-शिक्षा सहयोग को बताया अहम

आईआईटी मद्रास के आईसीएंडएसआर के डीन प्रोफेसर मनु संथनम ने कहा कि एमएसएमई के लिए नए उत्पाद और प्रौद्योगिकी विकसित करने तथा प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में नवाचार और शिक्षा-उद्योग सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका है।

गुणवत्ता और डिजिटलीकरण पर दिया जोर

भारतीय राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम परिषद के महानिदेशक हंसराज वर्मा ने कहा कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए गुणवत्ता जरूरी है। उन्होंने एमएसएमई के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करने में डिजिटलीकरण को भी महत्वपूर्ण बताया।

विशेषज्ञों ने निर्यात से जुड़े पहलुओं की दी जानकारी

एमएसएमई डीएफओ चेन्नई के निदेशक एवं प्रमुख धायलन ने मुख्य भाषण के साथ विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। एमएसएमई डीएफओ चेन्नई की उप निदेशक रेशमा राजीवन ने स्वागत भाषण में संगोष्ठी की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की और घरेलू बाजारों से वैश्विक अवसरों की ओर बढ़ने में एमएसएमई को सहायता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डिजिटल वाणिज्य और तकनीक की बढ़ती भूमिका पर चर्चा

संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बदलते स्वरूप और डिजिटल वाणिज्य, प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा बाजार संपर्क की बढ़ती भूमिका पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि डिजिटल माध्यम एमएसएमई को भौगोलिक सीमाओं से आगे बढ़कर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंचने में सक्षम बना रहे हैं।

डीजीएफटी, एक्जिम बैंक और ईसीजीसी के विशेषज्ञ हुए शामिल

तकनीकी सत्रों में विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी), एक्जिम बैंक, ईसीजीसी, आईआईटी मद्रास तथा निर्यात और ई-कॉमर्स परामर्श क्षेत्र के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने निर्यात प्रक्रियाओं, व्यापार वित्त, निर्यात जोखिम कम करने, बाजार की पहचान, अंतरराष्ट्रीय भुगतान, अनुपालन और डिजिटल ऑनबोर्डिंग से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी।

ई-कॉमर्स के जरिए निर्यात बढ़ाने के अवसर

विशेषज्ञों ने एमएसएमई को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए ई-कॉमर्स का प्रभावी इस्तेमाल करने के अवसरों पर भी चर्चा की। बाजार की पहचान से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कारोबार शुरू करने और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंच बनाने तक विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक जानकारी साझा की गई।

एमएसएमई की बाजार पहुंच मजबूत करने पर सरकार का जोर

संगोष्ठी में हुई चर्चाएं एमएसएमई की बाजार पहुंच मजबूत करने के सरकार के प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण रहीं। एमएसएमई मंत्रालय की क्रय एवं विपणन सहायता योजना में राष्ट्रीय कार्यशालाओं और सम्मेलनों को क्षमता निर्माण की पहल के रूप में शामिल किया गया है। इनका उद्देश्य एमएसएमई को बाजार पहुंच, पैकेजिंग, आयात-निर्यात प्रक्रियाओं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और बाजार विस्तार से जुड़े अवसरों के बारे में जागरूक करना है।

छात्रों और नए उद्यमियों को भी मिला मंच

चेन्नई में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ने छात्रों और महत्वाकांक्षी उद्यमियों को डिजिटल वाणिज्य, उद्यमिता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उभरते अवसरों को समझने के लिए मंच उपलब्ध कराया। इससे उन्हें निर्यात और डिजिटल कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों से सीधे व्यावहारिक जानकारी हासिल करने का अवसर मिला।

‘स्थानीय से वैश्विक’ बनाने की दिशा में पहल

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। इस दौरान विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं, विशेषज्ञों, पैनलिस्टों, एमएसएमई, छात्रों, भागीदार संस्थानों और आयोजन टीम के योगदान की सराहना की गई। मंत्रालय की यह पहल एमएसएमई के लिए बाजार पहुंच, डिजिटल अपनाने और निर्यात तैयारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और भारतीय उद्यमों को ‘स्थानीय से वैश्विक’ बनाने के प्रयासों में योगदान देती है। 

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