विशाखापत्तनम, 20 अगस्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक का दूसरा दिन गुरुवार को जनसंख्या असंतुलन के मुद्दे पर केंद्रित रहा। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले के गुडीलोवा में चल रही तीन दिवसीय बैठक में आगामी जनगणना में धर्म का उल्लेख किए जाने तथा इसके माध्यम से देश की धार्मिक जनसंख्या की वास्तविक स्थिति सामने लाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। यह जानकारी सूत्रों ने दी।
बैठक के पहले दिन बुधवार को संघ परिवार के विभिन्न संगठनों के वर्षभर के कार्यों की समीक्षा की गई। साथ ही आगामी अवधि की योजनाओं, विभिन्न गतिविधियों तथा सामाजिक विषयों पर आपसी समन्वय को लेकर विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों में जनसंख्या की संरचना में हो रहे बदलाव, इसके कारणों और सामाजिक प्रभावों पर प्रारंभिक चर्चा की गई। गुरुवार को इस विषय पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
विश्व हिंदू परिषद के प्रतिनिधियों सहित संघ परिवार के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने जनसंख्या में हो रहे बदलावों के संबंध में अपने अनुभव बैठक में साझा किए। इस चर्चा में जनसंख्या असंतुलन का मुद्दा प्रमुख रहा। बदलती जनसंख्या संरचना की पृष्ठभूमि में दीर्घकालीन राष्ट्रीय नीति के दृष्टिकोण से आवश्यक उपायों पर भी विचार किया गया।
जनगणना-2027 को लेकर सरकार ने 40 प्रश्नों की सूची पहले ही जारी कर दी है। जनगणना में नागरिकों से उनके धर्म के संबंध में जानकारी एकत्र किए जाने से देश में विभिन्न धर्मों के अनुयायियों की संख्या तथा कुल जनसंख्या में उनके अनुपात के संबंध में अधिकृत और सटीक आंकड़े सामने आने में सहायता मिलेगी। बैठक में इसी दृष्टिकोण से धर्म संबंधी जानकारी दर्ज किए जाने का समर्थन किया गया।
कुछ प्रतिनिधियों ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद भी अनेक लोग अपने पारंपरिक भारतीय नाम बरकरार रखते हैं। ऐसे में केवल नाम के आधार पर किसी व्यक्ति के धर्म परिवर्तन का पता लगाना संभव नहीं होता। इसलिए यदि जनगणना में धर्म की अलग से जानकारी दर्ज की जाती है तो देश की धार्मिक जनसंख्या की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगी। सूत्रों के अनुसार विश्व हिंदू परिषद के प्रतिनिधियों ने जनगणना में धर्म संबंधी जानकारी एकत्र किए जाने के निर्णय का स्वागत किया।
जनसंख्या असंतुलन के अलावा बैठक में नशामुक्ति, युवाओं में सामाजिक जागरूकता, पंच परिवर्तन तथा विकास की भारतीय अवधारणा जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
यूएससीआईआरएफ की भूमिका पर भी चर्चा-इस बीच, अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर कार्य करने वाले यूएस कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) के अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। साथ ही अमेरिकी सरकार से संघ के नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने का आग्रह भी किया गया है।
सरसंघचालक मोहन भागवत के 29 अगस्त से प्रस्तावित अमेरिका दौरे की पृष्ठभूमि में यूएससीआईआरएफ के इस बयान पर प्रतिक्रिया दी जाए या नहीं, इसे लेकर संघ में विचार-विमर्श चल रहा है। सूत्रों के अनुसार इस विषय पर संघ की आधिकारिक प्रतिक्रिया समन्वय बैठक के बाद सामने आने की संभावना है।-
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जनगणना में धर्म के उल्लेख पर संघ की समन्वय बैठक में चर्चा















