प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि नदियों का निरंतर प्रवाह हमें सिखाता है कि हम मानवता के कल्याण के लिए अपनी क्षमताओं का उपयोग कैसे कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि निस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना देश को एक नई दिशा देती है।
प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक सुभाषित पाठ सुनाया, जिसमें यह संदेश दिया गया है कि मनुष्य को अपना जीवन दूसरों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। जिस प्रकार नदियाँ निरंतर और निस्वार्थ भाव से बहती हुई अनगिनत जिंदगियों का पोषण करती हैं और अंततः सागर में विलीन हो जाती हैं, उसी प्रकार हमें भी अपना समय, क्षमताएँ और संसाधन दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित करने चाहिए। यह पाठ इस बात पर बल देता है कि मानव जीवन का सच्चा उद्देश्य और तृप्ति निस्वार्थ सेवा, करुणा और समस्त कल्याण में निहित है।
प्रधानमंत्री ने X पर लिखा;
"नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपनी विचारधारा का उपयोग मानवता के लिए कर सकते हैं। निःार्थ सेवा, दान और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।"
जीवनं स्वं पार्थाय नित्यं यच्चत् मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति उन्नतिगाः॥”















