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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने NIFT के दीक्षांत समारोह को किया संबोधित


देश 31 August 2026
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने NIFT के दीक्षांत समारोह को किया संबोधित

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वस्त्र और परिधान क्षेत्र न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह लाखों लोगों को रोजगार और आजीविका भी प्रदान करता है। राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान-निफ्ट के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों से जुड़े रहते हुए वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।

फैशन उद्योग में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर राष्ट्रपति ने कहा कि समारोह में शामिल करीब चार हजार विद्यार्थियों में लगभग 85 प्रतिशत महिलाएं हैं।

उन्होंने कहा कि फैशन और वस्त्र प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की वैश्विक उपस्थिति बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।   वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में युवाओं से योगदान देने का आह्वान करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनने का प्रयास करना चाहिए और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले चार दशक में निफ्ट के विद्यार्थियों और पेशेवरों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और भारत को पहचान दिलाई है। राष्ट्रपति ने स्नातक विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले छात्रों, उनके अभिभावकों और पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी।

केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि वर्ष 2008 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने निफ्ट के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया था। उसके 18 वर्ष बाद एक बार फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छात्रों का मार्गदर्शन किया। आज करीब चार हजार छात्रों को डिग्रियां भी प्रदान की।

वस्त्र मंत्रालय की सचिव और निफ्ट बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्ष नीलम शमी राव ने कहा कि छात्र ऐसे समय में स्नातक कर रहे हैं, जब वस्त्र, फैशन और डिजाइन के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस उद्योग में ये छात्र प्रवेश करेंगे, वह तेजी से बदल रहा है। शिल्प, फैशन, डिजाइन, इंजीनियरिंग, रचनात्मकता, प्रौद्योगिकी और वस्त्र क्षेत्र के बीच की सीमाएं लगातार कम हो रही हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य का फैशन भारत की पारंपरिक शिल्प कलाओं से मजबूती हासिल कर सकता है।

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