इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) ने आज सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए सेमीकॉन 2.0 की आधिकारिक अधिसूचना का स्वागत किया। एक बयान में, एसोसिएशन ने कहा कि यह व्यापक दृष्टिकोण भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को काफी हद तक बढ़ा सकता है, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित कर सकता है, उच्च-मूल्य वाले रोजगार सृजित कर सकता है और एक विश्वसनीय वैश्विक सेमीकंडक्टर भागीदार के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत कर सकता है। IESA के अध्यक्ष अशोक चंदक ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब विश्वसनीयता से क्षमता की ओर बढ़ रहा है और नीतिगत निरंतरता इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के पहले चरण में ही 12 स्वीकृत परियोजनाओं, सौ से अधिक डिजाइन स्टार्टअप्स के समर्थन, 355 से अधिक संस्थानों और 60 हजार छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स की उपलब्धता के माध्यम से विश्वास पैदा किया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल सेमीकंडक्टर कारखाने बनाने के बारे में नहीं है; यह उनके आसपास एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने और भारत में स्थायी क्षमताओं का सृजन करने के बारे में है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में अगले पांच से सात वर्षों में 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के संचयी निजी और औद्योगिक निवेश को उत्प्रेरित करने की क्षमता है।
श्री चंदक ने आगे बताया कि सेमीकॉन 2.0, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस), मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (ईएमसी) के साथ मिलकर घरेलू मूल्यवर्धन को गति दे सकता है, स्टार्टअप और एमएसएमई के लिए अवसर पैदा कर सकता है और वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं को आकर्षित कर सकता है। इससे भारत को विश्व के लिए विनिर्माण करने से लेकर विश्व के लिए प्रौद्योगिकी का निर्माण और स्वामित्व करने की दिशा में प्रगतिशील रूप से आगे बढ़ने में भी मदद मिलेगी।















