लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) पर तांबे की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। इसकी वजह रिफाइंड तांबे पर अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने की आशंका है, जिससे कारोबारियों ने तांबे की आपूर्ति अमेरिका भेजनी शुरू कर दी है और अन्य बाजारों के उपलब्धता कम हो गई है।
एलएमई पर तीन महीने के वायदा में तांबे की कीमत 0.8 प्रतिशत बढ़कर 14,533 डॉलर मीट्रिक टन के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई है, जो कि जनवरी में दर्ज उच्चतम स्तर 14,527.50 मीट्रिक टन से अधिक है।
इस साल अब तक तांबे की कीमत में करीब 17 प्रतिशत और पिछले 12 महीनों में करीब 47 प्रतिशत की तेजी आई है।
घरेलू बाजार में भी तांबा वायदा (सितंबर) 1.21 प्रतिशत यानी 16.8 रुपए तक बढ़कर सुबह 10:30 बजे तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 1,403.50 रुपए के इंट्राडे उच्च स्तर पर पहुंच गया।
तांबे में यह तेजी लंबे समय से चली आ रही आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन को दर्शाती है। पुरानी होती खदानें डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और बिजली ग्रिड से बढ़ती मांग के साथ तालमेल बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
हालांकि, तांबे की कीमतों में हालिया उछाल अंतिम उपभोक्ताओं की मांग में अचानक वृद्धि की बजाय टैरिफ से जुड़े आपूर्ति प्रवाह के कारण अधिक आया है।
इसके अलावा, अमेरिकी वाणिज्य विभाग को रिफाइंड तांबे पर टैरिफ लगाने की जरूरत को लेकर व्हाइट हाउस को सलाह देनी थी, लेकिन 30 जून की समयसीमा के दो महीने से अधिक समय बाद भी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
वैश्विक स्तर पर तांबे का भंडार अभी भी अपेक्षाकृत ऊंचा है, लेकिन तांबे का स्टॉक अमेरिका में केंद्रित हो गया है। इसके कारण एलएमई नेटवर्क के जरिए उपलब्ध तांबे की मात्रा कम हो गई है।
इसी तरह, हाजिर तांबा अभी भी तीन महीने के वायदा भाव से प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है। बाजार की इस स्थिति को ‘बैकवर्डेशन’ कहा जाता है और यह निकट अवधि में तांबे की आपूर्ति में कमी का संकेत देती है। पहली छमाही में वैश्विक तांबा खदान उत्पादन करीब 1 प्रतिशत घटा, जबकि कॉन्संट्रेट उत्पादन में 2.6 प्रतिशत की गिरावट आई।















