काठमांडू, 18 सितंबर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क जा रहे हैं। पांच दिवसीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शाह की केवल संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ द्विपक्षीय मुलाकात तय हुई है।
प्रधानमंत्री शाह 22 सितंबर को न्यूयॉर्क के लिए रवाना होंगे और 25 सितंबर की सुबह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। 26 सितंबर को उनके स्वदेश लौटने का कार्यक्रम है। वह न्यूयॉर्क में तीन दिन रहेंगे।
विदेश सचिव अमृत बहादुर राई ने बताया कि प्रधानमंत्री शाह और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के बीच मुलाकात होगी। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, महासचिव गुटेरेस से मुलाकात और महासभा को संबोधन के अलावा प्रधानमंत्री का कोई अन्य उच्चस्तरीय द्विपक्षीय कार्यक्रम तय नहीं है।
प्रधानमंत्री शाह ने अन्य नेताओं के साथ मुलाकातों में रुचि नहीं दिखाई है। सभी द्विपक्षीय बैठकों की जिम्मेदारी उन्होंने विदेश मंत्री शिशिर खनाल को दी है। महासभा के दौरान नेपाल द्वारा आयोजित किए जाने वाले ‘सगरमाथा से समुद्र तक: जलवायु लचीले भविष्य के लिए आह्वान’ बैठक में भी प्रधानमंत्री शाह शामिल नहीं होंगे। इस बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री खनाल करेंगे।
बैठक में वैश्विक जलवायु परिवर्तन के कारण खासकर हिमालयी क्षेत्रों पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव और उससे पैदा हो रहे विनाशकारी परिणामों पर चर्चा की जाएगी। नेपाल का उद्देश्य इस मुद्दे की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना है।
विदेश मंत्री शिशिर खनाल के नेतृत्व वाला नेपाली प्रतिनिधिमंडल करीब 10 दिन न्यूयॉर्क में रहेगा और विभिन्न उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेगा। खनाल शनिवार को न्यूयॉर्क रवाना होंगे। वह संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और अल्प विकसित देशों से संबंधित उच्चस्तरीय बैठकों में भाग लेंगे और नेपाल की ओर से संबोधन भी करेंगे।
विदेश मंत्री खनाल की भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और चीन के कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य तथा उपराष्ट्रपति हान झेंग के साथ मुलाकात की तैयारी है।
विदेश सचिव राई के अनुसार, प्रधानमंत्री शाह जलवायु परिवर्तन और उससे पैदा होने वाली आपदाओं के कारण नेपाल को बार-बार होने वाले बड़े पैमाने पर जनधन के नुकसान की ओर विश्व समुदाय का ध्यान आकर्षित करेंगे। वह यह मुद्दा भी उठाएंगे कि नेपाल का कार्बन उत्सर्जन बहुत कम होने के बावजूद उसे जलवायु परिवर्तन के गंभीर दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है।
भोटेकोशी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री शाह की यह यात्रा हो रही है। ऐसे में उनके संबोधन का मुख्य मुद्दा जलवायु न्याय रहने की संभावना है।
प्रधानमंत्री शाह के महासभा संबोधन के मसौदे पर फिलहाल चर्चा चल रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी भाषण को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। अधिकारियों के अनुसार, विशेषज्ञों और सोशल मीडिया के माध्यम से मिले सुझावों को भी संबोधन में शामिल किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री शाह अंतरराष्ट्रीय मंच से नेपाल के लिए जलवायु परिवर्तन से हुए नुकसान का तत्काल और उचित मुआवजा देने की मांग करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, वह विकसित और समृद्ध देशों से नेपाल में जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण, जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देने तथा संबंधित पक्षों की क्षमता विकास के लिए आवश्यक तकनीक और जलवायु वित्त आसानी से और रियायती शर्तों पर उपलब्ध कराने की अपील करेंगे।
नेपाल प्रकृति-अनुकूल जीवनशैली, 46 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र, विशाल हिमालयी क्षेत्र और व्यापक नदी प्रणाली के जरिए वैश्विक पर्यावरण संरक्षण में अपने योगदान को भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखेगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री के संबोधन के तुरंत बाद नेपाल को मुआवजे की राशि मिलना संभव नहीं है। प्रधानमंत्री इस मुद्दे को राजनीतिक एजेंडे के रूप में विश्व समुदाय के सामने रखेंगे और इसके बाद सरकारी तंत्र इसे आगे बढ़ाने का काम करेगा।
प्रधानमंत्री शाह के नेतृत्व वाले उच्चस्तरीय नेपाली प्रतिनिधिमंडल में इस बार कुल 16 सदस्य होंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री के साथ 11 और विदेश मंत्री खनाल के साथ पांच सदस्य न्यूयॉर्क जाएंगे।
प्रतिनिधिमंडल में प्रधानमंत्री के मुख्य सलाहकार कुमार व्यञ्जनकार, विदेश सचिव अमृत बहादुर राई, सह सचिव कृष्णप्रसाद ढकाल और प्रमुख शिष्टाचार महापाल कुमार खरेल समेत अन्य अधिकारी शामिल होंगे। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के लिए नेपाल के स्थायी प्रतिनिधि लोक बहादुर थापा भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होंगे।
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