भारत और अमेरिका के बीच चल रहा संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ सैन्य प्रशिक्षण और परिचालन क्षमताओं के आदान-प्रदान के साथ दोनों सेनाओं के जवानों के बीच आपसी समझ और सहयोग को भी बढ़ावा दे रहा है। उत्तराखंड के औली में चल रहे अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेना के जवानों ने बद्रीनाथ में आयोजित सांस्कृतिक उत्सव के जरिए ‘देवभूमि’ की परंपराओं को करीब से जाना, जबकि गोरसों बुग्याल में ट्रेकिंग के दौरान हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव किया। अभ्यास के 22वें संस्करण में भारत और अमेरिका के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं।
सैन्य प्रशिक्षण के साथ सांस्कृतिक अनुभव
अमेरिकी सेना की टुकड़ी के सदस्यों ने बद्रीनाथ में आयोजित सांस्कृतिक उत्सव में स्थानीय परंपराओं और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखी। गोरसों बुग्याल के प्राकृतिक परिवेश में ट्रेकिंग के दौरान उन्हें हिमालय की भव्यता को करीब से देखने का अवसर मिला। इस तरह संयुक्त अभ्यास में साझा प्रशिक्षण के साथ दोनों देशों के सैनिकों के बीच व्यक्तिगत और सांस्कृतिक अनुभवों का आदान-प्रदान भी हो रहा है।
संयुक्त प्लानिंग से बढ़ रही परिचालन समझ
भारतीय सेना के अनुसार, ‘युद्ध अभ्यास 2026’ में दोनों सेनाओं के स्टाफ अधिकारी संयुक्त प्लानिंग प्रक्रिया के जरिए मिशन का विश्लेषण, अपनी क्षमताओं का आकलन और बहु-क्षेत्रीय परिचालन वातावरण में खतरों का मूल्यांकन कर रहे हैं। इसके तहत दोनों पक्ष अपने अलग-अलग परिचालन अनुभव, योजना बनाने के तरीकों और क्षमताओं को साझा करते हुए संयुक्त परिचालन योजना तैयार कर रहे हैं।
इंटरऑपरेबिलिटी पर जोर
संयुक्त प्रशिक्षण का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, समन्वय के साथ निर्णय लेने की क्षमता और परिचालन समझ को बेहतर करना है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अभ्यास दोनों सेनाओं को रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं को साझा करने तथा अलग-अलग भूभागों और परिचालन परिस्थितियों में समन्वित सैन्य कार्रवाई की क्षमता बढ़ाने का अवसर देता है।
हथियारों और अनमैन्ड सिस्टम पर भी आदान-प्रदान
यूएस आर्मी पैसिफिक की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, अभ्यास के दौरान अमेरिकी और भारतीय सैनिकों ने हथियारों, उपकरणों और अनमैन्ड सिस्टम से जुड़ी जानकारी का आदान-प्रदान किया। दोनों पक्षों के जवानों ने एक-दूसरे के उपकरणों को समझा, तकनीकों को साझा किया और अनमैन्ड सिस्टम के संचालन का अभ्यास किया।
औली और महाजन में एक साथ अभ्यास
‘युद्ध अभ्यास 2026’ का 22वां संस्करण 15 सितंबर को उत्तराखंड के औली में शुरू हुआ। अभ्यास औली के साथ राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भी आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में संयुक्त सैन्य क्षमता बढ़ाने के साथ दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और संयुक्त योजना एवं कार्रवाई को मजबूत करना है।
ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल
इस बार अभ्यास में तकनीक के इस्तेमाल पर भी विशेष जोर है। औली में ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों के जरिए निगरानी एवं टोही तथा काउंटर-यूएएस प्रशिक्षण शामिल है। महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन और लाइव-फायर अभ्यास भी किया जा रहा है।
रक्षा सहयोग को मजबूत करने का मंच
‘युद्ध अभ्यास’ भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है। इसका उद्देश्य दोनों सेनाओं की संयुक्त परिचालन क्षमता और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना तथा रणनीति, तकनीक और परिचालन अनुभवों का आदान-प्रदान करना है। इस बार का अभ्यास सैन्य प्रशिक्षण के साथ तकनीकी सहयोग और सैनिकों के बीच आपसी समझ को भी आगे बढ़ाने का अवसर उपलब्ध करा रहा है।















