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युद्ध और वैश्विक संकटों के बीच UN में जुटेंगे विश्व नेता


विदेश 21 September 2026
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युद्ध और वैश्विक संकटों के बीच UN में जुटेंगे विश्व नेता

दुनिया के करीब 140 नेता और 53 अन्य देशों के प्रतिनिधि इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में वार्षिक उच्चस्तरीय बैठक के लिए जुटेंगे। इस बार की बैठक ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया कई लंबे समय से जारी युद्धों और गंभीर संकटों से जूझ रही है।

मंगलवार को बैठक की शुरुआत ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के पारंपरिक पहले राष्ट्रीय संबोधन से होगी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप महासभा को संबोधित करेंगे।

बैठक के दौरान खाड़ी क्षेत्र का संघर्ष, यूक्रेन युद्ध, गाजा की स्थिति और सूडान का गृहयुद्ध प्रमुख मुद्दे बने रहेंगे। इसके साथ ही जलवायु संकट, आतंकवाद, वैश्विक भूख और गरीबी के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के अनियंत्रित विकास से पैदा होने वाले संभावित खतरे पर भी चर्चा होगी।

औपचारिक भाषणों से ज्यादा अहम होंगी पर्दे के पीछे की बैठकें

महासभा के विशाल कक्ष में होने वाले भाषण इस उच्चस्तरीय बैठक का सबसे दिखाई देने वाला हिस्सा होंगे। इनमें वैश्विक समस्याओं पर नेताओं के विचारों के साथ एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप और अपनी उपलब्धियों का उल्लेख भी देखने को मिल सकता है।

हालांकि, कई महत्वपूर्ण चर्चाएं संयुक्त राष्ट्र परिसर के गलियारों, विभिन्न देशों के मिशनों, होटलों और अस्थायी बैठक कक्षों में होंगी। नेताओं के बीच अनौपचारिक मुलाकातें भी संकटों के समाधान की दिशा में बातचीत का रास्ता खोल सकती हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पत्रकारों से कहा कि इस सप्ताह का इस्तेमाल संकटों से जुड़े नेताओं के बीच बड़ी संख्या में बैठकें कराने के लिए किया जाना चाहिए।

उन्होंने पिछले साल अमेरिका और कई मुस्लिम देशों के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक का उदाहरण देते हुए कहा कि इसी तरह की बातचीत से गाजा के लिए शांति योजना तैयार करने में मदद मिली थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस पहलू पर गुटेरेस की बात से सहमति जताई। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि पिछले साल हुई ऐसी ही बैठक से गाजा के लिए ‘Board of Peace’ के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी।

भारत की ओर से जयशंकर रखेंगे पक्ष

वर्तमान महासभा सत्र के अध्यक्ष बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस वर्ष की थीम है— “विश्वास बहाल करना, बदलाव का प्रबंधन करना: ऐसा संयुक्त राष्ट्र जो सभी के लिए काम करे।”

दुनिया के राष्ट्रपति, राजा, प्रधानमंत्री और मंत्री संयुक्त राष्ट्र के मंच से अपने-अपने देशों का पक्ष रखेंगे। हालांकि, इस बार तीन प्रमुख नेता बैठक में मौजूद नहीं होंगे। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हैं।

भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे।

शी जिनपिंग की अनुपस्थिति इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि वह इसी सप्ताह अमेरिका जाएंगे और गुरुवार को वॉशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे।

इसके विपरीत, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मौजूदगी महत्वपूर्ण होगी। वह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के संबोधन के एक दिन बाद महासभा को संबोधित करेंगे। दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष अब सातवें महीने में प्रवेश कर चुका है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की भी बैठक में मौजूद रहेंगे। उनका देश रूस के आक्रमण के पांचवें वर्ष का सामना कर रहा है।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू गुरुवार को महासभा को संबोधित करेंगे और गाजा में अपने देश की कार्रवाई का पक्ष रखेंगे। वहीं, अमेरिका ने फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को वीजा देने से इनकार कर दिया है।

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