नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत के साथ मौजूदा संबंधों को ‘बेहतरीन’ बताया है। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि राजनीतिक मोर्चे पर दोनों देशों के संबंधों में कभी-कभी उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन काठमांडू भारत के साथ संबंधों में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रहा है और चुनौतियों के बजाय सहयोग के अवसरों पर ध्यान दे रहा है। खनाल ने यह भी कहा कि भारत के साथ नेपाल के संबंध बहुआयामी हैं और नेपाल के कुल व्यापार का करीब दो-तिहाई हिस्सा भारत के साथ होता है।
जयशंकर से न्यूयॉर्क में हुई मुलाकात
खनाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच कई उच्चस्तरीय यात्राएं और बातचीत हुई हैं। उन्होंने बताया कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान उनकी भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने 23 सितंबर को द्विपक्षीय संबंधों और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में हाल में नेपाल में आई बाढ़ के बाद भारत की ओर से मिली सहायता का भी उल्लेख किया गया।
व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर
एशिया सोसाइटी के वैश्विक अध्यक्ष एवं सीईओ केविन रुड के साथ बातचीत में खनाल ने भारत-नेपाल संबंधों को बहुआयामी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी मजबूत हैं। जून 2026 में भारत यात्रा के दौरान खनाल और जयशंकर ने व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, विकास सहयोग और लोगों के बीच संबंधों समेत द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की समीक्षा की थी।
भारत-चीन संबंधों में व्यावहारिक दृष्टिकोण
भारत और चीन के बीच संतुलन साधने से जुड़े सवाल पर खनाल ने कहा कि नेपाल अतीत में पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को वैचारिक नजरिये से देखता रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार का जोर अत्यधिक वैचारिक दृष्टिकोण के बजाय सहयोग के व्यावहारिक क्षेत्रों पर है।
विवादित मुद्दों के बजाय अवसरों पर ध्यान
खनाल ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ सीमा जैसे विवादित मुद्दे स्वाभाविक रूप से मौजूद हो सकते हैं, लेकिन नेपाल का मौजूदा दृष्टिकोण यह देखने का है कि अवसर कहां हैं। उन्होंने भारत के साथ भी इसी व्यावहारिक दृष्टिकोण को अपनाने की बात कही। उनके अनुसार, ऊर्जा व्यापार में सकारात्मक गति देखने को मिल रही है, जबकि नेपाल की अर्थव्यवस्था आयात पर काफी निर्भर है।
नेपाल की भौगोलिक स्थिति को अवसर बताया
एशिया सोसाइटी में अपने शुरुआती संबोधन में खनाल ने कहा कि भारत और चीन जैसे बड़े पड़ोसियों के बीच स्थित होने के कारण नेपाल आकार में छोटा दिखाई दे सकता है, लेकिन उसकी भौगोलिक स्थिति को महत्वाकांक्षा की सीमा नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने नेपाल को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित देश बताया।
भारत के साथ निकटता को उत्पादन से जोड़ने पर जोर
भारत के संदर्भ में खनाल ने नेपाल का ध्यान ‘निकटता को उत्पादन के अवसर में बदलने’ पर होने की बात कही। उन्होंने भारत के साथ नेपाल की 1,700 किलोमीटर से अधिक लंबी खुली सीमा का उल्लेख किया, जो उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से लगती है। उन्होंने कहा कि यह भौगोलिक निकटता व्यापार, निवेश और विनिर्माण के अवसर पैदा कर सकती है।
ऊर्जा और विनिर्माण में सहयोग की संभावनाएं
खनाल ने कहा कि मजबूत आपूर्ति श्रृंखला चाहने वाली भारतीय और वैश्विक कंपनियों के लिए नेपाल में, खासकर विशेष आर्थिक क्षेत्रों में, विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने की संभावनाएं हैं। उन्होंने कम लागत वाली हरित ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच को नेपाल की संभावित ताकतों के रूप में रेखांकित किया।
चीन के साथ भी वाणिज्यिक हितों पर जोर
चीन के साथ संबंधों पर खनाल ने कहा कि नेपाल का दृष्टिकोण व्यावहारिक और वाणिज्यिक हितों पर आधारित है तथा दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित है। नेपाल सरकार की ओर से पहले भी भारत और चीन दोनों के साथ संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान और पारस्परिक लाभ के आधार पर संबंध मजबूत करने की नीति व्यक्त की गई है।















