US-Iran
Conflict : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक
बार फिर हालात बिगड़ने के संकेत मिले हैं. वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक,
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से दिए गए 7
दिन के सीजफायर प्रस्ताव को खारिज कर दिया है.
ईरान ने क्या रखा था 7 दिन का प्लान?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के
दौरान बताया था कि तेहरान ने अमेरिका को एक सात दिन का रोडमैप दिया है. प्रस्ताव
में अमेरिकी सैन्य दबाव और नाकेबंदी में ढील मिलने पर सात दिनों के भीतर स्ट्रेट
ऑफ होर्मुज को फिर खोलने की बात कही गई है. साथ ही ईरान चाहता है कि इनके परमाणु
कार्यक्रम पर बातचीत दोबारा शुरू की जाए.
ट्रंप ने चुनाव के बाद समझौते की बात कही थी
इससे पहले 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने
संबोधन के दौरान ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की संभावना का जिक्र किया था.
उन्होंने कहा था कि समझौता चुनाव के बाद हो सकता है और ईरान को अपने परमाणु
कार्यक्रम को लेकर फैसला करना होगा. ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान के खिलाफ बेहद
कड़े सैन्य विकल्प की भी बात कही थी.
होर्मुज पर टिकी दुनिया की नजर
ईरान के प्रस्ताव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का दोबारा खुलना सबसे अहम
पहलुओं में से एक है. यह दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल और समुद्री व्यापार
मार्ग है. ऐसे में इसके आसपास जारी तनाव का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित
नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और शिपिंग पर भी पड़
सकता है.
ईरान बोला- बातचीत के लिए तैयार
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अराघची लगातार
कूटनीति पर जोर दे रहे हैं. ईरानी पक्ष का कहना है कि वह परमाणु कार्यक्रम को लेकर
बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और दबाव
में कमी जरूरी है. दूसरी ओर, अमेरिकी रुख को लेकर फिलहाल
तस्वीर साफ नहीं है.
ऐसे में ईरान के 7 दिन के प्रस्ताव और
अमेरिका के संभावित अगले कदम पर अब पूरी दुनिया की नजर है. खासकर नवंबर के अमेरिकी
मिडटर्म चुनाव के बाद दोनों देशों के बीच तनाव किस दिशा में जाता है, यह आने वाले दिनों में अहम मुद्दा रहेगा.















