अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने G20 देशों से एक नए अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था के निर्माण में सहयोग करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि दशकों पहले तैयार किया गया वैश्विक व्यापार तंत्र आज अतिरिक्त उत्पादन, आर्थिक दबाव, जबरन मजदूरी और अन्य नई चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है।
मिलवॉकी में बुधवार को G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक की शुरुआत करते हुए ग्रीर ने चार प्रमुख मुद्दों पर खुली चर्चा की जरूरत बताई। इनमें खाद्य आपूर्ति का राजनीतिक इस्तेमाल, संरचनात्मक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (MFN) सिद्धांत और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन मजदूरी शामिल हैं।
ग्रीर ने कहा कि G20 की बैठक में शामिल देश नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था के संभावित निर्माता हैं। उनके मुताबिक 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जो मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप हो।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पिछले वर्ष से टैरिफ और द्विपक्षीय समझौतों के जरिए अपने व्यापार संबंधों में बदलाव शुरू किया है। इसका उद्देश्य व्यापार घाटे को कम करना, आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में निष्पक्षता, पारस्परिकता और संतुलन बढ़ाना है।
ग्रीर ने सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र यानी MFN सिद्धांत पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इसे वैश्विक व्यापार व्यवस्था की आधारशिला माना जाता है, लेकिन समय-समय पर यह देखना जरूरी है कि यह मौजूदा जरूरतों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं। उनके अनुसार, बिना शर्त MFN लागू करने से देशों की विकृत व्यापार नीतियों पर प्रतिक्रिया देने और बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता सीमित हो सकती है।
अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के मुद्दे पर ग्रीर ने कहा कि घरेलू मांग से कहीं अधिक उत्पादन को बढ़ावा देने वाली गैर-बाजार नीतियों का असर दूसरे देशों पर भी पड़ता है। इससे अन्य अर्थव्यवस्थाओं के उत्पादकों और कामगारों पर दबाव बढ़ सकता है।
उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन मजदूरी को मानवाधिकार के साथ-साथ व्यापार से जुड़ा मुद्दा बताया। ग्रीर के अनुसार, जबरन मजदूरी से तैयार किए गए उत्पाद कृत्रिम रूप से कम कीमत पर वैश्विक बाजार में पहुंच सकते हैं, जिससे अन्य उत्पादकों को नुकसान हो सकता है।
ग्रीर ने G20 देशों से कठिन व्यापार मुद्दों को केवल विश्व व्यापार संगठन (WTO) के स्तर पर भेजने के बजाय G20 के भीतर ही खुलकर चर्चा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मुश्किल मुद्दों पर बातचीत को किसी दूसरे मंच पर टालने के बजाय यहां रचनात्मक और स्पष्ट चर्चा होनी चाहिए।
भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का जिक्र करते हुए ग्रीर ने व्यापार व्यवस्था में सुधार को लंबी प्रक्रिया बताया। उन्होंने स्पेन के बार्सिलोना में सागरादा फमिलिया के निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि संतुलित और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था बनाने का काम भी लंबे समय तक जारी रहेगा। इसी दौरान उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि शायद पीयूष गोयल लंबे समय तक व्यापार मंत्री बने रहेंगे।
ग्रीर ने कहा कि व्यापार व्यवस्था में सुधार का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा व्यवस्था से जुड़ी हर चीज को खत्म कर दिया जाए। हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल इसलिए पुराने विचारों को अपरिवर्तित नहीं रखा जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने दशकों तक अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित किया है।
उन्होंने 2016 में G20 नेताओं द्वारा अतिरिक्त औद्योगिक उत्पादन क्षमता की समस्या से निपटने की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। ग्रीर ने कहा कि दस साल बाद भी यह समस्या वैश्विक अर्थव्यवस्था में और बड़ी विकृति का रूप ले चुकी है।
मिलवॉकी में आयोजित यह दो दिवसीय व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक अमेरिकी G20 अध्यक्षता का हिस्सा है। इसके बाद अमेरिका G20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। ग्रीर ने कहा कि व्यापार बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच यह समझ और तात्कालिकता बढ़ाना है कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है।
उन्होंने मिलवॉकी को इस चर्चा के लिए उपयुक्त स्थान बताया, क्योंकि शहर का विनिर्माण क्षेत्र से ऐतिहासिक संबंध रहा है। बैठक से पहले प्रतिनिधियों ने रॉकवेल ऑटोमेशन के एक उत्पादन केंद्र का दौरा भी किया। ग्रीर ने कहा कि यह दौरा उस तरह की उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था का उदाहरण है, जिसे ट्रंप प्रशासन बढ़ावा देना चाहता है।















