केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF यानी
हवाई ईंधन) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क (Export Levies) में
कटौती कर दी है. सरकार का यह नया फैसला 1 अक्टूबर 2026
से लागू हो गया है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार,
डीजल पर निर्यात शुल्क घटाकर 16 रुपये प्रति
लीटर और एटीएफ पर 10.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.
लगातार दूसरे पखवाड़े (Fortnight) में सरकार ने निर्यातकों
और रिफाइनरियों को राहत देने के लिए यह कदम उठाया है.
किस ईंधन पर कितनी कटौती हुई है?
अगर दरों की तुलना पिछले पखवाड़े (16 सितंबर से लागू दरों)
से करें, तो सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन के टैक्स में सीधी
कटौती की है:
- डीजल: निर्यात
शुल्क 20 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर
कर दिया गया है (4 रुपये की कटौती).
- एटीएफ
(ATF): निर्यात शुल्क
15 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 10.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है (4.5 रुपये की
कटौती).
- पेट्रोल: इसके
निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यह 0.5 रुपये
प्रति लीटर पर ही बरकरार है.
सितंबर की शुरुआत से देखें तो 1 सितंबर से अब तक डीजल
पर कुल 9 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 8.5 रुपये प्रति लीटर की बड़ी राहत दी जा चुकी है.
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों
की औसतन कीमतों की समीक्षा हर 15 दिन में की जाती है. इसी
समीक्षा तंत्र (Review Mechanism) के आधार पर यह निर्णय लिया
गया है.
आपको बता दें कि पश्चिम एशिया संकट (West
Asia Crisis) के दौरान घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो और
कंपनियां सारा तेल विदेशों में न बेचने लगें, इसलिए सरकार ने
27 मार्च 2026 से इन निर्यातों पर
शुल्क लगाना शुरू किया था. अब वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए हर
पखवाड़े इन दरों को समायोजित (Adjust) किया जाता है.
आम जनता और घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर होगा?
अगर आप सोच रहे हैं कि आपके शहर के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल या
डीजल सस्ता होगा, तो ऐसा नहीं है. वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण के
अनुसार, देश के भीतर बेचे जाने वाले (Domestic
Consumption) पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (Excise
Duty) की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
यह कटौती केवल उन तेल कंपनियों के लिए है जो देश से बाहर डीजल और
हवाई ईंधन का निर्यात करती हैं. अगले पखवाड़े में अंतरराष्ट्रीय कीमतों की स्थिति
को देखते हुए सरकार एक बार फिर इन दरों की समीक्षा करेगी.















