प्रणवी उर्स एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बनीं। उन्होंने अंतिम दौर में एक स्ट्रोक की मामूली बढ़त बनाए रखते हुए यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। उन्होंने टीम को रजत पदक दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई।
मैसूर की 23 वर्षीय खिलाड़ी ने तीसरे होल पर लगाए गए भयानक ट्रिपल बोगी से उबरते हुए तीन बर्डी लगाईं, जिससे उनकी तीन स्ट्रोक की बढ़त खत्म हो गई थी। अंतिम राउंड में 70 के स्कोर के साथ, उन्होंने चार दिनों में कुल 15-अंडर 265 का स्कोर बनाया और बाकी खिलाड़ियों से एक स्ट्रोक आगे रहीं।
प्रणवी के प्रदर्शन ने अदिति अशोक (अंतिम दौर में 67वें स्थान पर) और दीक्षा डागर (अंतिम दौर में 77वें स्थान पर) के साथ मिलकर भारत को टीम रजत पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रणवी का यह पदक 2002 में शिव कपूर द्वारा जीते गए पुरुषों के व्यक्तिगत वर्ग के स्वर्ण पदक के बाद भारत का पहला स्वर्ण पदक था।
मैसूर की रहने वाली प्रणवी उर्स ने प्रतियोगिता के दौरान कई उतार-चढ़ाव का सामना किया। अंतिम दौर में तीसरे होल पर उन्हें ट्रिपल बोगी का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई थी। हालांकि, उन्होंने धैर्य नहीं खोया और जल्द ही अपने खेल को संभालते हुए शानदार वापसी की। मुश्किल परिस्थिति में मानसिक मजबूती और तकनीकी कौशल का परिचय देते हुए प्रणवी ने बाकी होल्स में अपने प्रदर्शन को नियंत्रित रखा। आखिरी चरण तक उन्होंने अपनी बढ़त बनाए रखी और ऐतिहासिक स्वर्ण पदक हासिल किया।
प्रणवी की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि एशियाई खेलों जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर गोल्फ में भारत की महिला खिलाड़ियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उनके प्रदर्शन ने दिखाया कि भारतीय महिला गोल्फर भी एशिया के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अपनी मजबूत जगह बना सकती हैं। व्यक्तिगत स्वर्ण पदक के साथ-साथ प्रणवी ने भारतीय टीम को रजत पदक दिलाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस तरह उनके अभियान का अंत व्यक्तिगत और टीम दोनों स्तरों पर शानदार उपलब्धि के साथ हुआ।
प्रणवी उर्स की इस ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय खेल जगत में उनकी उपलब्धि की चर्चा हो रही है। कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का प्रदर्शन उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी सफलता युवा खिलाड़ियों को यह संदेश देती है कि बड़े मंच पर दबाव के बावजूद आत्मविश्वास, निरंतर अभ्यास और संयम के साथ लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। प्रणवी की स्वर्णिम जीत भारतीय महिला गोल्फ के लिए एक यादगार उपलब्धि बन गई है और आने वाले समय में देश के कई युवा गोल्फरों को इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती है।















