भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान 40 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।
RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों की घोषणा करते हुए मल्होत्रा ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों का ऊंचा स्तर, वैश्विक व्यापार में अतिरिक्त रुकावट और सख्त वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां भारत की ग्रोथ पर असर डाल सकती हैं।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। मल्होत्रा ने कहा कि 40 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी वैश्विक चुनौतियों के बीच आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को दर्शाती है।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रही। इसमें मजबूत निजी खपत और निवेश गतिविधियों का योगदान रहा। निवेश में करीब 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि नेट एक्सपोर्ट का योगदान भी सकारात्मक रहा।
RBI गवर्नर के अनुसार दूसरी तिमाही के हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतक आर्थिक गतिविधियों में गति बने रहने का संकेत दे रहे हैं, हालांकि पिछली तिमाही की तुलना में कुछ moderation देखा गया है। मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि लागत दबाव के बावजूद स्थिर रही, जबकि सर्विसेज सेक्टर में घरेलू और बाहरी मांग के समर्थन से व्यापक मजबूती बनी रही।
उन्होंने कहा कि निजी खपत broadly resilient रही और फिक्स्ड investment भी मजबूत बना हुआ है। हालांकि, non-durable goods और घरेलू एयर पैसेंजर ट्रैफिक में कुछ कमजोरी दिखाई दी।
मल्होत्रा ने कहा कि जुलाई और अगस्त में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में डबल- डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई, जबकि सर्विसेज एक्सपोर्ट में भी तेजी आई। आगे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सप्लाई चेन में व्यवधान घरेलू आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और मजबूत एल नीनो की स्थिति आगामी रबी सीजन और ग्रामीण मांग पर भी असर डाल सकती है।
उन्होंने कहा कि लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, निजी कैपेक्स में सुधार और मजबूत क्रेडिट फ्लो निवेश गतिविधियों को समर्थन देंगे। सर्विसेज एक्सपोर्ट के मजबूत बने रहने की उम्मीद है, जबकि हाल में लागू हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौते मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट को समर्थन दे सकते हैं।















