लद्दाख के जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता और इनोवेटर सोनम वांगचुक एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर 2026 को होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के सवाल पर वांगचुक ने वीडियो जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि वह फिलहाल दिल्ली में नहीं, बल्कि लद्दाख में हैं और आने वाली सर्दियों की तैयारियों में जुटे हुए हैं। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों को अपना समर्थन देते हुए कहा कि देश में राजनीतिक समस्याओं के अलावा भी कई ऐसे गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। अपनी बात रखने के लिए उन्होंने मशहूर शायर फैज अहमद फैज की पंक्तियों को नए अंदाज में पेश किया—“और भी गम हैं जमाने में सियासत के सिवा।
वांगचुक ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि सरकार की ओर से उनके काम में रुकावटें डालने और नुकसान पहुंचाने की कोशिशों के बावजूद उनका काम जारी है। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा और हिमालयी क्षेत्र की जल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान दे रहे हैं। सर्दियों के आने से पहले लद्दाख में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए कृत्रिम ग्लेशियर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि स्थानीय लोगों को जरूरत के समय पानी मिल सके। इसके साथ ही ग्लेशियरों से जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को कम करने के लिए भी प्रयोग किए जा रहे हैं।
सोनम वांगचुक ने विशेष रूप से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के खतरे का जिक्र किया। यह ऐसी स्थिति होती है, जब ग्लेशियरों से बनी झीलों का पानी अचानक बाहर निकलकर बाढ़ का रूप ले लेता है। इससे पहाड़ी इलाकों में जान-माल और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंच सकता है। वांगचुक के मुताबिक, ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में 200 से अधिक ऐसी खतरनाक झीलों पर ध्यान देने और संभावित जोखिम कम करने की जरूरत है। उनका मानना है कि इन खतरों से निपटने की तैयारी भी उतनी ही जरूरी है, जितनी राजनीतिक मुद्दों पर आवाज उठाना।














