पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान अकादमी (AcSIR) ने संयुक्त पीएचडी कार्यक्रम शुरू करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत मंत्रालय के सभी 10 अनुसंधान संस्थानों को AcSIR से संबद्ध अनुसंधान संस्थान का दर्जा दिया गया है। इससे पृथ्वी प्रणाली विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में शोध और उच्च शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस साझेदारी के जरिए मंत्रालय के अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्रों और वैज्ञानिक विशेषज्ञता को AcSIR की लचीली शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इसके तहत वायुमंडलीय विज्ञान, महासागर विज्ञान और ध्रुवीय विज्ञान सहित पृथ्वी प्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों में पीएचडी कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
यह सहयोग मंत्रालय और उसके सभी 10 अनुसंधान संस्थानों को एक साझा शोध एवं शैक्षणिक व्यवस्था के तहत लाएगा। इसका उद्देश्य समुद्र विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान, जल विज्ञान और ग्रह प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में उन्नत अनुसंधान को बढ़ावा देना, संसाधनों और बुनियादी ढांचे का साझा उपयोग करना तथा युवा वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला ने कहा कि इस साझेदारी से मंत्रालय को काफी लाभ होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सहयोग पृथ्वी विज्ञान से जुड़े शिक्षकों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के शोधकर्ताओं और पूरे वैज्ञानिक समुदाय के लिए उपयोगी साबित होगा।
इस संयुक्त व्यवस्था के तहत AcSIR के पीएचडी कार्यक्रम में चयनित विद्यार्थी मंत्रालय के अनुसंधान संस्थानों में शोध कर सकेंगे। उनके शोध का मार्गदर्शन मंत्रालय के ऐसे वैज्ञानिक करेंगे, जिन्हें AcSIR के संकाय सदस्य के रूप में मान्यता प्राप्त है। पीएचडी की डिग्री AcSIR प्रदान करेगा और डिग्री प्रमाणपत्र पर उस संबंधित संस्थान का उल्लेख भी होगा, जहां विद्यार्थी ने शोध किया है।
बयान के अनुसार, मंत्रालय के सभी 10 अनुसंधान संस्थान AcSIR के नवीनतम पीएचडी प्रवेश चक्र में भाग ले रहे हैं। शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारु बनाने के लिए प्रत्येक संस्थान में AcSIR के नोडल समन्वयक नियुक्त किए गए हैं। इसके साथ ही मंत्रालय में एक केंद्रीय समन्वयक भी नियुक्त किया गया है।
इस साझेदारी के तहत विद्यार्थियों को पृथ्वी प्रणाली विज्ञान के कई विशिष्ट क्षेत्रों में शोध के अवसर मिलेंगे। इनमें मौसम पूर्वानुमान और जलवायु सेवाएं, संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान, ध्रुवीय क्षेत्र एवं हिममंडल अनुसंधान, महासागर अवलोकन, समुद्री रोबोटिक्स, गहरे समुद्र में खनन, समुद्री जल का विलवणीकरण, भूकंप विज्ञान, भूकंपीय जोखिम का आकलन, तटीय प्रक्रियाएं और समुद्री जीव संसाधन शामिल हैं। इसके अलावा, पृथ्वी विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) के अनुप्रयोगों पर भी शोध किया जा सकेगा।
समझौते में बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। शोध से उत्पन्न बौद्धिक संपदा में विद्यार्थी को आविष्कारक के रूप में श्रेय दिया जाएगा, जबकि संयुक्त बौद्धिक संपदा का स्वामित्व दोनों पक्षों के बीच साझा होगा।
इस सहयोग से पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में अंतर्विषयक अनुसंधान को बढ़ावा मिलने और राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के बीच संसाधनों के बेहतर उपयोग का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।















