यूरोपीय संघ की 'रीआर्म यूरोप' पहल के तहत रक्षा उपकरणों की बढ़ती मांग और देश के घरेलू विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के चलते भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कल मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान ये बातें कही। उन्होंने बताया कि भारत का रक्षा निर्यात अब तक के उच्चतम स्तर 38,424 करोड़ रुपये (लगभग 36 लाख यूरो के बराबर) पर पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि यूरोप को निर्यात में वृद्धि मुख्य रूप से मानक गोला-बारूद, तोप के गोले और अन्य बड़े और छोटे कैलिबर के गोला-बारूद की बढ़ती मांग के कारण हुई है।
श्री सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में 16 प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, लगभग 840 बड़े और मध्यम आकार के निजी उद्यम और लगभग 17 हजार छोटे उद्यम शामिल हैं, जिनमें स्टार्टअप भी शामिल हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करता है। देश के रक्षा निर्यात में तोपखाने और गोला-बारूद से लेकर छोटे हथियार, हेलमेट, बुलेटप्रूफ जैकेट और अन्य सामरिक उपकरण शामिल हैं।
श्री सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वार्षिक रक्षा पूंजीगत व्यय का 75 प्रतिशत, जिसका अनुमान 20 से 25 अरब डॉलर है, घरेलू स्तर पर खर्च किया जाए, जिसमें भारतीय डिजाइन, विकास और निर्माण वाले उत्पादों को प्राथमिकता दी जाए।
रक्षा सचिव ने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय रक्षा निर्माता अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, विशेष रूप से दक्षिण पूर्व एशिया में, रक्षा उपकरणों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए रुचि आकर्षित कर रहे हैं, जिसमें छोटे हथियार, घटक और तोपखाने प्रणाली शामिल हैं।
रक्षा सचिव ने कहा कि भारत यूरोपीय साझेदारों के साथ संयुक्त उद्यमों के माध्यम से यूरोपीय रक्षा खरीद में अपनी भागीदारी बढ़ाने की योजना बना रहा है, साथ ही 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत यूरोपीय कंपनियों को भारत में उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय और यूरोपीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं के बेहतर एकीकरण से अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने और सहयोग को मजबूत करने में मदद मिलेगी।













