केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ग्लोबल जियोपॉलिटिकल झगड़ों और खास समुद्री रुकावटों के बीच भारत के एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम की मज़बूती पर ज़ोर दिया है। वे गोवा में 29वें एनर्जी टेक्नोलॉजी मीट के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे। मंत्री ने कहा कि दुनिया भर में कच्चे तेल का प्रोडक्शन लगातार डिमांड से ज़्यादा हो रहा है। श्री पुरी ने कहा कि भारत ने अपने कच्चे तेल के सप्लाई सोर्स में विविधता लाई है, जिससे सप्लायर देशों की संख्या 27 से बढ़कर 41 हो गई है। उन्होंने देश की एनर्जी सप्लाई की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सखालिन-1 और वैंकोर समेत रूसी तेल और गैस एसेट्स में लगभग साढ़े पाँच बिलियन US डॉलर के इन्वेस्टमेंट पर भी ज़ोर दिया। भारत की रिफाइनिंग क्षमताओं पर ज़ोर देते हुए, मंत्री ने कहा कि देश की रिफाइनिंग क्षमता बढ़कर लगभग 290 मिलियन मीट्रिक टन सालाना हो गई है। भारत हर दिन लगभग 11 लाख बैरल रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स इंटरनेशनल मार्केट में एक्सपोर्ट भी करता है।
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारत ने कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले देशों की संख्या 27 से बढ़ाकर 41 कर दी है। इस कदम से किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भरता कम करने और वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रभाव को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध, राजनीतिक तनाव और समुद्री परिवहन मार्गों में रुकावटों का असर तेल की कीमतों और आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में विविध स्रोतों से कच्चा तेल प्राप्त करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाता है।
मंत्री ने रूस में भारत के ऊर्जा निवेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने सखालिन-1 और वैंकोर जैसी रूसी तेल एवं गैस परियोजनाओं में लगभग 5.5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की बात कही। इन परियोजनाओं में निवेश का उद्देश्य ऊर्जा संसाधनों तक पहुंच बनाए रखना और देश की दीर्घकालिक जरूरतों के लिए आपूर्ति के विकल्पों को मजबूत करना है।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता का जिक्र करते हुए पुरी ने कहा कि देश की वार्षिक रिफाइनिंग क्षमता लगभग 290 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। मजबूत रिफाइनिंग व्यवस्था भारत को कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और अन्य उपयोगी पेट्रोलियम उत्पादों में बदलने में सक्षम बनाती है। इसके अलावा, भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिदिन लगभग 11 लाख बैरल रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करता है।
कुल मिलाकर, भारत की ऊर्जा नीति का लक्ष्य घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार में अपनी भूमिका मजबूत करना है। आपूर्ति के विविध स्रोत, विदेशी ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश और बढ़ती रिफाइनिंग क्षमता देश को संभावित संकटों से निपटने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच ऊर्जा की उपलब्धता और किफायती कीमतों को बनाए रखना भारत के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बना रहेगा।














