भारत में ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए अक्टूबर 2026 तक 5,55,610 मीट्रिक टन सालाना से अधिक के समझौते किए जा चुके हैं। सरकार के अनुसार, इन समझौतों के साथ भारत ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति प्रतिबद्धताओं के मामले में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन गया है। इससे 90,000 करोड़ रुपये (करीब 9.5 अरब डॉलर) से अधिक के स्वच्छ ऊर्जा निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने गुरुवार को कहा कि भारतीय कंपनियों ने ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए 23 प्रमुख समझौते किए हैं, जिनके तहत सालाना 5.5 लाख मीट्रिक टन से अधिक आपूर्ति की प्रतिबद्धता है। इनमें 70 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति वैश्विक बाजारों में निर्यात के लिए निर्धारित है। उन्होंने कहा कि इससे स्वच्छ ऊर्जा निवेश और हरित रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
जोशी के अनुसार, वर्ष 2026 में भारतीय कंपनियों ने 4 लाख मीट्रिक टन सालाना से अधिक ग्रीन हाइड्रोजन समतुल्य आपूर्ति के लिए 18 नए समझौते किए हैं।
सरकार के बयान के मुताबिक, भारतीय कंपनियां ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल की प्रतिस्पर्धी कीमतों के साथ यूरोप और जापान जैसे बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत कर रही हैं। ग्रीन अमोनिया का इस्तेमाल वैश्विक जहाजरानी क्षेत्र में स्वच्छ ईंधन के रूप में किया जा सकता है। इसके अलावा, ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले के साथ अमोनिया का इस्तेमाल कर कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। उर्वरक उत्पादन और तेल शोधन क्षेत्र में भी ग्रीन हाइड्रोजन से बने उत्पादों का उपयोग औद्योगिक उत्सर्जन घटाने के लिए बढ़ रहा है।
भारतीय कंपनियों के प्रमुख समझौतों में एसीएमई ग्रुप का जापान की आईएचआई के साथ ग्रीन अमोनिया की सालाना 4,88,000 मीट्रिक टन आपूर्ति का करार शामिल है। कंपनी ने जापान की मित्सुबिशी गैस केमिकल (MGC) को सालाना एक लाख मीट्रिक टन ग्रीन मेथनॉल की आपूर्ति के लिए भी समझौता किया है।
एलएंडटी और इटोचू ने सालाना तीन लाख टन ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति के लिए एक विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) बनाई है। इस समझौते के तहत दिसंबर 2029 से आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने दक्षिण कोरिया की सैमसंग सीएंडटी कॉरपोरेशन के साथ तीन अरब डॉलर से अधिक मूल्य का दीर्घकालिक आपूर्ति एवं खरीद समझौता किया है। इसे वैश्विक स्तर पर ग्रीन अमोनिया के सबसे बड़े आपूर्ति समझौतों में से एक बताया गया है। इसके तहत 2028 तक आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है। वहीं, अगस्त्य श्रीलंका की एसएआर को सालाना 2,50,000 मीट्रिक टन ग्रीन मेथनॉल की आपूर्ति के लिए समझौते की प्रक्रिया में है।
एएम ग्रीन ने भी तीन प्रमुख समझौते किए हैं। कंपनी को जर्मनी की हिंटको द्वारा संचालित ‘एच2ग्लोबल’ नीलामी में एशियाई श्रेणी का एकमात्र विजेता चुना गया। इसके तहत कंपनी जर्मनी को गैर-जैविक स्रोतों से प्राप्त नवीकरणीय ईंधन (RFNBO) श्रेणी का अमोनिया उपलब्ध कराएगी। समझौते के तहत हिंटको 10 वर्षों में कम से कम 58.5 करोड़ यूरो मूल्य का अमोनिया खरीदेगी। जर्मनी को पहली आपूर्ति 2029 में शुरू होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, एएम ग्रीन ने जर्मनी की यूनिपर के साथ सालाना 2,50,000 मीट्रिक टन ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति के लिए पक्का समझौता किया है। कंपनी ने जापान की प्रमुख बिजली उत्पादक कंपनी जेईआरए के साथ भी दीर्घकालिक आधार पर सालाना 70,000 मीट्रिक टन ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति के लिए बाध्यकारी प्रारंभिक समझौता किया है।
जूनो जूल्स ने जर्मनी की सेलेक्ट एनर्जी जीएमबीएच के साथ प्रतिदिन 600 टन ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति का समझौता किया है। यह मात्रा सालाना लगभग 2,19,000 मीट्रिक टन के बराबर है।
घरेलू मांग बढ़ाने के लिए सरकार के रणनीतिक हस्तक्षेप कार्यक्रम (SIGHT) के तहत भी समझौते किए गए हैं। इस कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर की 11 उर्वरक इकाइयों को सालाना 6,70,000 मीट्रिक टन ग्रीन अमोनिया के उत्पादन और आपूर्ति के लिए समझौते किए गए हैं।
इसी कार्यक्रम के तहत इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और नुमालीगढ़ रिफाइनरी (NRL) की रिफाइनरियों को सालाना 30,000 मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए परियोजनाएं भी आवंटित की गई हैं।













