दुनियाभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर लोगों की जेब पर लगातार दबाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कई देशों में ईंधन की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई बड़े देशों और वैश्विक औसत के मुकाबले कम हैं। 30 अक्टूबर 2026 को जारी वैश्विक ईंधन कीमतों के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में पेट्रोल की औसत कीमत करीब 108.97 रुपये प्रति लीटर और डीजल की औसत कीमत लगभग 98.10 रुपये प्रति लीटर है। वहीं, दुनिया में पेट्रोल की औसत कीमत करीब 150 रुपये और डीजल की औसत कीमत लगभग 159 रुपये प्रति लीटर बताई गई है। यानी वैश्विक औसत की तुलना में भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल करीब 41 रुपये और डीजल लगभग 61 रुपये प्रति लीटर सस्ता मिल रहा है।
अगर अलग-अलग देशों की कीमतों पर नजर डालें तो अमेरिका में पेट्रोल करीब 115.25 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में इसकी कीमत लगभग 110.49 रुपये, कनाडा में 134.97 रुपये और चीन में करीब 132.02 रुपये प्रति लीटर है। वहीं पाकिस्तान में भी पेट्रोल की कीमत भारतीय मुद्रा के हिसाब से लगभग 132.02 रुपये प्रति लीटर बताई गई है। बांग्लादेश में पेट्रोल करीब 126.87 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। विकसित देशों की बात करें तो ब्रिटेन में पेट्रोल की कीमत लगभग 220.60 रुपये, फ्रांस में 224.31 रुपये और सिंगापुर में 238.32 रुपये प्रति लीटर है। हांगकांग में स्थिति और भी अलग है, जहां पेट्रोल की कीमत करीब 421.58 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। यानी भारत की तुलना में हांगकांग के लोगों को एक लीटर पेट्रोल के लिए लगभग चार गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
डीजल की कीमतों में भी देशों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है। वैश्विक स्तर पर डीजल की औसत कीमत करीब 159 रुपये प्रति लीटर है, जबकि भारत में इसका औसत भाव लगभग 98.10 रुपये है। हांगकांग में डीजल की कीमत करीब 463 रुपये प्रति लीटर बताई गई है। इससे साफ है कि अलग-अलग देशों में ईंधन की कीमतें उनकी आर्थिक नीतियों और कर व्यवस्था के आधार पर काफी अलग हैं।
अब सवाल उठता है कि भारत में कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात होने के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई देशों से कम कैसे हैं? दरअसल, किसी भी देश में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत से तय नहीं होते। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स, वैट, परिवहन खर्च, रिफाइनिंग लागत और पेट्रोलियम कंपनियों का मार्जिन भी शामिल होता है। कुछ देश पेट्रोलियम उत्पादों पर भारी टैक्स लगाते हैं, जबकि कई देश अपने नागरिकों को राहत देने के लिए ईंधन पर सब्सिडी देते हैं। तेल उत्पादक देश होने के बावजूद वहां पेट्रोल सस्ता ही हो, यह जरूरी नहीं है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर भी वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी तरह की बाधा अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतें महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। कुल मिलाकर, वैश्विक आंकड़े बताते हैं कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों के मामले में भारत कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर स्थिति में है। हालांकि, देश के अलग-अलग राज्यों में टैक्स और परिवहन लागत के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग होते हैं।














