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दिल्ली में सांस लेना मुश्किल, दिवाली से पहले हवा हुई जहरीली, AQI 451 तक पहुंचा


देश 03 November 2026
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दिल्ली में सांस लेना मुश्किल, दिवाली से पहले हवा हुई जहरीली, AQI 451 तक पहुंचा

देश की राजधानी दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। दिवाली का त्योहार आने से पहले ही दिल्ली की हवा बेहद खराब स्थिति में पहुंच गई है। मंगलवार, 3 नवंबर की सुबह राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, सुबह 8 बजे दिल्ली का AQI 451 तक पहुंच गया, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, जहांगीरपुरी में सबसे अधिक 451 AQI दर्ज किया गया। वहीं, दिल्ली का औसत AQI सुबह 8 बजे करीब 330 और सुबह 7 बजे 331 के आसपास रहा। इस स्थिति ने राजधानी में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आसमान में धुंध की मोटी परत दिखाई दे रही है और सुबह के समय कई इलाकों में दूर तक देख पाना मुश्किल हो रहा है। दिवाली से पहले हवा की बिगड़ती गुणवत्ता को देखते हुए स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं

दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर लगातार चिंताजनक बना हुआ है। CPCB के आंकड़ों के अनुसार, जहांगीरपुरी में AQI 451 दर्ज किया गया, जबकि रोहिणी में 429, पंजाबी बाग में 424 और बवाना में 409 से 408 के बीच प्रदूषण का स्तर सामने आया। इसके अलावा पटपड़गंज में 379, आरके पुरम में 374, आईटीओ में 373, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 355 और चांदनी चौक में 352 AQI दर्ज किया गया। वहीं, आईजीआई एयरपोर्ट टर्मिनल-3 में 287, आनंद विहार में 279 और लोधी रोड में 226 AQI रिकॉर्ड किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राजधानी के अधिकांश इलाके प्रदूषण की चपेट में हैं। नोएडा और गुरुग्राम के कई हिस्सों में भी धुंध का असर दिखाई दे रहा है

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM ने 2 नवंबर को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण को लागू कर दिया है। इसके तहत दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के संबंधित एनसीआर क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के उपाय तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन को प्रमुख सड़कों और अधिक यातायात वाले इलाकों में नियमित रूप से मैकेनिकल और वैक्यूम स्वीपिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा सड़कों पर धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव और डस्ट सप्रेसेंट का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रदूषण फैलाने वाले निर्माण स्थलों का निरीक्षण भी बढ़ाया जाएगा। ट्रैफिक जाम वाले स्थानों और प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने और पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे उपाय भी GRAP-2 का हिस्सा हैं


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