भारत ने सुरक्षा परिषद (UNSC) के 2028-29 कार्यकाल के चुनाव के लिए ‘शांति स्थापना’ (पीसकीपिंग) को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बताया है। भारत का स्पष्ट संकल्प है कि वह संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना अभियानों को और मजबूत करेगा तथा शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
शांति स्थापना को मुख्य उद्देश्य माना
भारत के मिशन में सैन्य सलाहकार कर्नल तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने गुरुवार को कहा, “हम शांति स्थापना को इस संस्था के मुख्य उद्देश्य के लिए अपरिहार्य मानते हैं। यही कारण है कि भारत ने 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद में अपनी उम्मीदवारी के लिए इसे एक प्राथमिकता के रूप में चुना है।”
इस कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद के चुनाव अगले साल होने हैं।
उन्होंने कहा, “हम संयुक्त राष्ट्र की शांति स्थापना प्रक्रिया के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराते हैं। हम एक ऐसी शांति स्थापना व्यवस्था चाहते हैं, जिसमें बेहतर संसाधन हों, बेहतर सुरक्षा हो और जो उस दुनिया का बेहतर प्रतिनिधित्व करे, जिसकी वह सेवा करती है।”
भारत का अब तक का सबसे बड़ा योगदान
कर्नल सिंह ने बताया कि भारत ने अब तक 50 अभियानों में 3 लाख से अधिक सैनिक तैनात किए हैं, जो उसे संयुक्त राष्ट्र में सबसे बड़ा सैन्य योगदानकर्ता बनाता है। उन्होंने महासभा की चौथी समिति में शांति स्थापना अभियानों की व्यापक समीक्षा पर आयोजित वार्षिक बहस के दौरान ये बातें कहीं।
उन्होंने याद दिलाया कि जब भारत पिछली बार सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष था, तब उसने शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन पर हमला करने वालों को न्याय के कटघरे में लाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई थी।
शांति सैनिकों की सुरक्षा पर फोकस
अगस्त 2021 में अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत ने सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें शांति सैनिकों के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की गई थी। भारत इस मुद्दे पर अपना नेतृत्व जारी रखेगा।
कर्नल सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के ‘ब्लू हेलमेट’ (शांति सैनिक) आज असममित (asymmetric) और तकनीक से जुड़े खतरों का सामना कर रहे हैं। जो लोग शांति सैनिकों पर हमला करते हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के अभियानों में 184 भारतीयों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है।
जनादेश बनाने में योगदानकर्ताओं की भूमिका जरूरी
उन्होंने जोर दिया कि जिन देशों के सैनिक और पुलिसकर्मी इन अभियानों में शामिल हैं, उन्हें सुरक्षा परिषद द्वारा तय किए जाने वाले जनादेश को आकार देने में अपनी बात रखने का व्यवस्थित अधिकार होना चाहिए। किसी भी जनादेश को अपनाने या उसकी समीक्षा करने से पहले सैनिक और पुलिस बल देने वाले देशों के साथ परामर्श के लिए संस्थागत तंत्र होना जरूरी है।
कर्नल सिंह ने कहा कि शांति स्थापना अभियान तब सबसे ज्यादा सफल होते हैं, जब उनके पीछे व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया हो, राजनीतिक परिणाम स्पष्ट हों और शांति सैनिकों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों। अभियान को मंजूरी देते समय ही क्षमताओं को बढ़ाने और संसाधन उपलब्ध कराने का इंतजाम कर लिया जाना चाहिए।















